24 October, 2007

मिडिया साक्षरता


आजकल मिडिया को लेकर सब लोग परेशान हैं। लोग मिडिया में - भ्रष्टाचार, पक्षपात, सनसनी फैलाना, अंधविश्वास को बढ़ावा देना, अनुपातहीनता, झूठी रिपोर्टिंग, आम जनता के मुद्दों की अनदेखी करने आदि सभी दुर्गुण देखने लगे हैं।

सूचना का उपयोग/उपभोग करने वाले हर व्यक्ति का सूचना साक्षर होना अत्यन्त आवश्यक है। मुझे पंचतन्त्र का एक सूत्र बहुत पसन्द है -

अज्ञातकुलशीलस्य वासो देयो न कस्यचिद्


(जिसका कुल और शील अज्ञात हो, उसको अपने घर रहने की अनुमति नहीं देनी चाहिये।)

यह सूत्र भारतीय मिडिया पर भी लागू होता है। क्या आप भारतीय मिडिया के स्वामित्व आदि के बारे में कुछ जानते हैं?

नीचे दिये हुए आंकड़े क्या कहते हैं? मुझे तो ऐसा लगता है कि भारत के अधिकांश मिडिया की लगाम अभारतीय या भारत-विरोधी हाथों में है। ऐसी दशा में इनसे क्या अपेक्षा कर सकते है?

(यह सामग्री मुझे अन्तरजाल से मिली है,
इसके बारे में मेरी खुद की जानकारी शून्य है)

"a) NDTV: Funded by Gospels of Charity in Spain
supports Communism. Recently it has developed a soft
corner towards Pakistan because Pakistan President has
allowed only this channel to be aired in Pakistan .

b) CNN-IBN: 100% Funded by Southern Baptist Church
with its branches in all over the world with HQ in US.
The Church annually allocates 800 Million Dollars for
Promotion of its channel.

c) TIMES GROUP LIST: TIMES OF INDIA, MID-DAY,
NAV-BHARTH TIMES, STARDUST, FEMINA, VIJAYA TIMES,
VIJAYA KARNATAKA, TIMES NOW (24 hr News Channel) &
many more.

Times Group is owned by Bennet & Coleman. 80% of the
Funding is done by "WORLD CHRISTIAN COUNCIL", and
balance 20% is equally shared by an Englishman and an
Italian.

D) STAR TV: Is run by an Australian, who is supported
by St.Peters Pontificial Church Melbourne.

E) HINDUSTAN TIMES: Owned by Birla Group, but hands
have changed since Shobana Bhartiya took over.
Presently it is working in Collobration with Times
Group.

F) The Hindu: A English Daily, started over 125 years
has been recently taken over by Joshua Society, Berne
, Switzerland .

G) INDIAN EXPRESS: DIVDED INTO TWO GROUPS. THE INDIAN
EXPRESS & NEW INDIAN EXPRESS (SOUTHERN EDITION). Acts
Ministries has major stake in the Indian express and
later is still with the Indian counterpart

H) EENADU : Still to date controlled by an Indian
named Ramoji Rao

I) Andhra Jyothi : The MUSLIM PARTY OF HYDERABAD known
as (MIM) along with a Congress Minister Has purchased
this Telgu daily very recently.

j) The Statesman: It is controlled by Communist Party
of India

k) Kairali TV: It is Controlled by Communist party of
India (Marxist)

l) Mathrabhoomi: leaders of Muslim league and
Communist Leaders have major investment.

m) Asian Age & Deccan Chronicle: Is owned by a Saudi
Arabian Company with its chief Editor M.J.AKBAR." Unquote



11 comments:

आशीष said...

अच्छी जानकारी है लोगों के लिए

GWALIOR TIMES said...

भाई अनुनाद सिंह,
मान गये, बहुत तगड़ी और दूर की कौड़ी लाये हैं आप । हमारा तो ध्‍यान कभी इस ओर गया ही नहीं ।
मगर बहुत कड़वा सच, बड़ी ताकत के साथ आपने बोला है । सूचना संचार और समाचार हमारी आत्‍मीय ऊर्जायें हैं, हम आश्रित हैं या मोहताज या फिर अक्षम या संसाधन विहीन या फिर घर के जोगी जोगना, आन गॉंव के सिद्ध । विचार मन्‍थन मन में कौंध गये हैं । कुछ करना पड़ेगा भाई , जरूरी है ।
ग्‍वालियर टाइम्‍स की खास खबर में लगाऊंगा ।
सप्रेम सस्‍नेह ।
नरेन्‍द्र सिंह तोमर ''आनन्‍द''

Shiv Kumar Mishra said...

अनुनाद जी,
बहुत बढ़िया जानकारी....तभी हम कहें कि.....

संजीव कुमार सिन्हा said...

अनुनादजी आपने हमारी आंखें खोल दी। अब समझ में आया भारतीय मीडिया में आम लोगों, गांव, गरीब, किसान के लिए स्‍पेस क्‍यों नहीं है। दूसरी ओर कमीनिस्‍टों और कम्‍युनलिस्‍टों से भारतीय मीडिया त्रस्‍त है।

संजय बेंगाणी said...

हम मुस्कुरा रहें है. :)

अनूप शुक्ल said...

हां यह जानकारी कानपुर् के एक् टेबलायड् अखबार् ने हिंदी में छापी थी।

Shastri JC Philip said...

मुझे यह जानकारी काफी चौकाने वाली एवं दर्दनाक लगी. इसकी जांच होनी चाहिये क्योंकि यदि इन माध्यमओं का नियंत्रण विदेशियों के हाथ में है तो इनके बहिष्कार के लिये आंदोलन चालू होना चाहिये.

आजकल मै़ अपने दफ्तर से बाहर हूँ अत: जाल की सुविधा न के बराबर है. अत: टिप्पणिया़ कम हो पा रही हैं. लेख पहले से लिख लिये थे अत: सारथी पर नियमित छप रहे है.

-- शास्त्री

हिन्दी ही हिन्दुस्तान को एक सूत्र में पिरो सकती है

अनिल रघुराज said...

अनुनाद जी, बहुत देर से आपके ब्लॉग पर आया तो टिप्पणी भी देर से कर रहा हूं। क्षमा कीजिएगा।
मीडिया के मालिकाने पर आपकी दी गई जानकारी चौंकानेवाली है। लेकिन मेरे मन में दो सवाल हैं।
एक,यह जानकारी जनवरी 2007 से ही नेट की दुनिया में हू-ब-हू इसी रूप में कट्टर हिंदूवादी संगठनों की तरफ से फैलाई जा रही है। फिर अचानक आप इस प्रचार का हिस्सा कैसे बन गए? सायास या अनायास?
दो, भारत सरकार के कानून के तहत न्यूज और करेंट अफेयर्स से जुड़े किसी भी मीडिया संस्थान में विदेशी पूंजी का हिस्सा 26 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता। अगर आप लोगों की जानकारी पुख्ता है तो इसे अभी तक राष्ट्रपति समेत गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के पास क्यों नहीं भेजा गया?
अगर आप बिना पुष्टि किए इस जानकारी को प्रचारित कर रहे हैं तो मीडिया की तरह आप भी तो सनसनी परोस रहे हैं, मुझे लगता है कि कम से कम ब्लॉगिंग की बड़ी आत्मीय और निष्छल दुनिया में जिससे बचा जाना चाहिए था।

अनुनाद सिंह said...

अनिल जी,
इस प्रविष्टि का प्रतिकार आप और अच्छे ढ़ंग से कर सकते थे - इसमें दी हुई किसी सूचना को असत्य सिद्ध करके। मेरे पास इतना संसाधन नहीं है कि मै इन तथ्यों का परिक्षण कर सकूं ; और इसी लिये मैने बहुत स्पष्ट लिख दिया है कि यह सूचना कहीं और से ली हुई है।

यदि यह सूचना आंशिक या पूर्ण रूपेण गलत सिद्ध होती है, तो यह सभी भारतप्रेमियों के लिये खुशी की बात होगी।

अनिल रघुराज said...

अनुनाद जी, मैं अनावश्यक विवाद में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अलग से नहीं लिख रहा। आपने मेल की बात कमेंट में भी लिखी है तो मेल पर ही भेजी गई जानकारी यहां भी लगा दे रहा हूं। जो मीडिया कंपनियां शेयर बाज़ार में लिस्टेड हैं, उनके मालिकाने (इक्विटी पूंजी की संरचना) की जानकारी बीएसई या एनएसई के मिल जाती है। मैं यहां एनडीटीवी और हिंदुस्तान टाइम्स की पूंजी संरचना की जानकारी दे रहा हूं।
एनडीटीवी : 30 सितंबर 2007 तक की ताज़ा सूचना के मुताबिक कंपनी की कुल पूंजी है 25 करोड़ 97 हज़ार 388 रुपए जो चार रुपए अंकित मू्ल्य के 6 करोड़ 25 लाख 24 हजा़र 372 शेयरों में विभाजित है। इसका 53.27 फीसदी हिस्सा भारतीय प्रवर्तकों (प्रणब रॉय और राधिका रॉय) के पास है। कंपनी के 8.69 फीसदी आम भारतीय निवेशकों के पास हैं (मेरे पास भी इसके 100 शेयर हैं)...
भारतीय म्यूचुअल फंडों, यूटीआई और बैंकों व वित्तीय संस्थाओं के पास कंपनी के 19.31 फीसदी शेयर पूंजी है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के पास कंपनी के केवल 1.33 फीसदी शेयर हैं।
Gospels of Charity in Spain से इसका कोई लेना-देना नहीं है। हां, मुशर्रफ ने इसे इंटरव्यू दिया था। लेकिन मुशर्रफ के खिलाफ खबर चलाने पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है। यह अलग बात है कि कंपनी के मालिक प्रणब रॉय पूर्व नौकरशाह हैं और अफसरशाही या बड़े लोगों को साधने की कला में माहिर हैं। यही वजह है कि हिंदी चैनल लाने के पहले उनके ज्यादातर कर्मचारी किसी न किसी सरकारी अफसर के परिवार से जुड़े हुए थे।
हिंदुस्तान टाइम्स: 30 सितंबर 2007 तक की ताज़ा सूचना के मुताबिक एचटी मीडिया की कुल पूंजी 46 करोड़ 84 लाख 58 हज़ार 410 रुपए है जो दो रुपए अंकित मूल्य के 23 करोड़ 42 लाख 29 हज़ार 205 शेयरों में विभाजित है। इसका 68.73 फीसदी हिस्सा भारतीय प्रवर्तकों (के के बिड़ला समूह) के पास है। इसके 8.30 फीसदी शेयर भारतीय म्यूचुअल फंडों और यूटीआई के पास हैं, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) के पास कंपनी के 18.78 फीसदी शेयर हैं। अनिवासी भारतीयों और अन्य विदेशी निकायों के पास इसके मात्र 0.19 फीसदी शेयर हैं। आम निवेशकों के पास कंपनी के 2.87 फीसदी शेयर हैं। टाइम्स समूह से इसकी प्रमुख होड़ है, इसलिए मालिकाने में उसके साथ साझेदारी की बात पूरी तरह निराधार है। हां, शोभना भरतिया के व्यक्तिगत ताल्लुक किसी से भी हो सकते हैं। लेकिन उससे कंपनी के मालिकाने या चरित्र पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह लिस्टेड कंपनी है और कंपनी के हर फैसले को सार्वजनिक करना अनिवार्य है।
स्टेट्समैन : आपने कहा है कि यह अखबार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का है, जो इसके कर्मचारियों और पत्रकारों का घोर अपमान है। इस अखबार के प्रधान संपादक काफी लंबे अरसे तक सी आर ईरानी रहे हैं, जिनका निधन करीब दो साल पहले हो गया। सीपीआई जब इंदिरा गांधी के आपातकाल के साथ खड़ी थी, जब ईरानी के नेतृत्व ने उसका जबरदस्त विरोध किया। जो भी खबर सेंसर की जाती थी, उसकी जगह अखबार में खाली छोड़ दी जाती थी।
असल में स्टेट्समैन भारत का सबसे पुराना 132 साल पुराना (1875 से प्रकाशन) अखबार है। इसका कोई एक मालिक नहीं है। असल में इसकी सारी पूंजी सार्वजनिक ट्रस्टों, कर्मचारियों और अखबार से जुड़े वरिष्ठ पत्रकारों के बीच विभाजित है। यह अखबार सामूहिक मालिकाने की मिसाल है। इसीलिए कभी भी यह किसी राजनीतिक दबाव में नहीं काम करता। इसके वर्तमान संपादक और प्रबंधन निदेशक (एमडी) रवींद्र कुमार हैं जो खुद पत्रकार हैं और 25 सालों से स्टेट्समैन में काम कर रहे हैं।
ऑफिस में से थोड़ा सा वक्त निकालकर मैंने यह जानकारी जुटाई है। आशा है आपके काम की होगी। मेरी टिप्पणी का अन्यथा मत लीजिएगा। मैं तो बस इतना चाहता हूं कि गोयबल्स की तरह झूठ का सच साबित करने की कोशिशों को रोका जाए और सच, जहां तक संभव हो, सबके सामने लाया जाए।

अनुनाद सिंह said...

अनिल भाई,

भारतीय शेयर बाजार का हाल सबको पता है। कितने दिनो से देश में और इस देश के संसद में चर्चा चल रही है कि भारत के शेयर बाजार में आतंकवादियों का पैसा लगा हुआ है। कौन नहीं जानता कि बालीवुड में दाउद 'भाई' पैसा लगाते हैं। बालीवुड भी सदा से जनसंचार का सशक्त माध्यम रहा है। ऐसे में 'घरेलू' निवेशक का भी कोई मतलब नहीं है। दावूद भाई को आप 'घरेलू' मानते हैं , तो अलग बात है!