28 March, 2008

देवनागरी फाण्ट परिवर्तक

नीचे बहुत से फाँट परिवर्तकों के लिंक दिए गए हैंये सभी जावास्क्रिप्ट में हैंवैज्ञानिक एवम तकनीकी हिन्दी समूह पर जाकर इन्हें डाउनलोड करके अपने डेस्कटाप पर भी चलाया जा सकता है

जिस परिवर्तक को चलाना चाहते हैं उसके लिंक पर क्लिक कीजिये:


पुराने फाँट से यूनीकोड में परिवर्तन

Agra font to unicode converter03

Chanakya to Unicode converter09

DV-YogeshEN-to-Unicode converter06

DVB-YogeshEN-to-Unicode converter02

DVBW-YogeshEN-to-Unicode converter02

HTChanakya-to-Unicode converter07

Krutidev010-to-Unicode converter06

Sanskrit99 to unicode converter15

Shivaji to unicode converter05

श्री-लिपि से यूनिकोड परिवर्तक





यूनीकोड से पुराने फाँट में परिवर्तन :

Unicode to Agra font converter03

Unicode-to-Chanakya converter06

Unicode-to-DV-YogeshEN converter03

Unicode-to-DVB-YogeshEN converter02

Unicode-to-DVBW-YogeshEN converter02

Unicode-to-HTChanakya converter02

Unicode-to-Krutidev010 converter05

Unicode-to-sanskrit99 converter07



उपरोक्त परिवर्तकों के अतिरिक्त बहुत से अन्य परिवर्तक भी उपलब्ध हैंफाँट परिवर्तकों की विस्तृत सूची औरउनके लिंक के लिए यहाँ जाइए


48 comments:

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

अनुनाद भाई, आप·ो जितना भी धन्यवाद ·हा जाए या बधाई दी जाए, ·म होगा. वास्तव में हिंदी ·ो आगे बढ़ाने में आप·े इस ·ार्य ·ा जितना योगदान होगा, उस·ा अभी अंदाजा नहीं लगाया जा स·ता है. मैं प्रयोग ·र·े देख चु·ा. यह प्रति·्रिया मैं आप·ो फांट परिवर्तित ·र·े ही दे रहा हूं. इसमें ·ुछ मामूली ·मियां हैं, उन्हें आप समझ भी रहे होंगे. अब इन·ो भी निपटा ही लेंगे, इसमें संशय ·ा ·ोई ·ारण नहीं है.

Gyandutt Pandey said...

आप तो धुन के पक्के व्यक्ति लगते हैं। बड़े काम के लिंक दिये हैं आपने। अनेकानेक धन्यवाद।

दीपक भारतदीप said...

अनुनाद सिंह जी
अगर आपका कोई टूल इनमें से कृति देव या देव फॉण्ट को यूनिकोड में बदल सकता है तो मेरे काम का है. मैंने कृति देव वाले को टेक्स्ट फाइल में डेस्कटॉप में लिया है. पहले भी एक ब्लोगर के कहने पर मैंने एक टूल लिया था पर वह काम न आया. एक आग्रह आपसे कर रहा हूँ कि अगर आप मुझे इनमें से किसी टूल को डेस्कटॉप पर सेव करने से लेकर थोडा बता सकें तो आपका आभारी रहूँगा. जब डेस्कटॉप पर इसे लाऊँ तो किस फाईल के रूप में लाऊँ. हो सकता है लाना हो एक के रूप में और ले जाऊं दूसरे के रूप में. आप अच्छा काम कर रहे हैं इसके लिए बधाई.
दीपक भारतदीप

अविनाश said...

फॉन्‍ट कन्‍वर्टर के मामले में आपने पहले भी हिंदी प्रेमियों को राह दिखाई है। दो कदम का सफ़र और तय करके आपने ये राह थोड़ी और आसान कर दी है। आपको अशेष मंगलकामनाएं।

दीपक भारतदीप said...

अनुनाद सिंह जी

मैने आपके इस टूल का प्रयोग कर देखा काम कर रहा है। अब यह ब्लाग पर कैसे काम करेगा यह भी देख लेंगे। हां यूनिकोड में काम करते.करते इस पर काम करना कठिन लग रहा है। वैसे भी ब्लाग पर सीधे काम करने के कारण कृतिदेव और देव पर कभी सीधे काम नहीं किया है। देखते हैं आगे क्या होता है।
दीपक भारतदीप
yah aapke tool ka hee kiyaa hai aur kaam kar rhaa hai.

sanjay patel said...

अनुनाद भाई....हिन्दी फ़ोंट रूपांतरण का जो अनु-नाद आपने किया वह वंदनीय है...साधुवाद आपको.

अनुनाद सिंह said...

इष्टदेव जी, ज्ञानदत्त जी और दीपक जी,

आपलोगों के प्रिय वाक्यों के लिये साधुवाद!


दीपक जी,

इस सूची में आप देख सकते हैं कि कृतिदेव०१० को यूनिकोड में बदलने का टूल सम्मिलित है। जहाँ तक इसे आपके डेस्कटाप पर डाउनलोड करने और वहाँ से चलाने का प्रश्न है, यह सम्भव ही नहीं बल्कि बहुत आसान भी है।

आप सबसे पहले इस पृष्ठ पर जाइये:
http://groups.google.com/group/technical-hindi/files

यहाँ पर अनेक अन्य फाइलों के साथ ही निम्नलिखिल फाइल भी दिखेगी:
krutidev010-to-Unicode converter04.htm

इसके उपर कर्सर ले जाइये और 'राइट क्लिक' करें। ऐसा करने पर एक मेनू खुलेगा जिसमें save target as... है। इसे क्लिक कीजिये और इस फाइल को अपने डेस्कटाप पर HTML फाइल के रूप में जतन कर दीजिये। बस काम हो गया। जब भी आप अपने डेस्कटाप पर स्थित इस HTML फाइल पर क्लिक करेंगे तो आपका फाण्ट परिवर्तक आपकी सेवा में प्रस्तुत हो जायेगा।

यदि कोई समस्या आती है तो बताइयेगा।

Priyankar said...

प्रिय अनुनाद ! आभार !

सी-डैक का भी एक 'परिवर्तक' नामक उपकरण है .एक सीडी में अन्य सॉफ़्टवेयर्स के साथ इसकी एक कॉपी मेरे पास भी है . रजनीश मंगला के ब्लॉग पर भी इसकी व्यवस्था है .

हिंदी के सामने फ़ॉन्ट की 'कन्वर्टिबिलिटी' एक बड़ी चुनौती है . आप इस पर ध्यान दे रहे हैं,यह हम सब के लिए सुखद और सहायक स्थिति है .

Debashish said...

साधुवाद के पात्र हैं आप अनुनाद! मेरा सुझाव होगा कि गूगल समूह की बजाय इसे गूगल पेजेस पर डाल दें। इससे जालपता बेहतर बन पायेगा।

Ashok Pande said...

बहुत दिनों से मुझे इस की तलाश थी भाई! बहुत बहुत धन्यवाद. बहुत ही कारआमद वस्तु उपलब्ध करवाई है आपने.

संदीप said...

धन्यवाद अनुनाद भाई,


मुझे कृतिदेव में टाइप करने में आसानी होती है, और यूनिकोड का प्रयोग करने पर फायरफॉक्‍स में कुछ दिक्कत भी आ रही थी, आपके लिंक से काम आसान हो गया

yunus said...

धन्‍यवाद भाई । बेहतरीन काम ।

अल्पना वर्मा said...

लेख ग्यानवर्धक है-लेकिन सुशा लिपि से युनि कोड मै कैसे बदले??

अनुनाद सिंह said...

अल्पना जी,

आपका कहना सही है कि उपरोक्त सूची में से कोई भी परिवर्तक शुशा के लिये नहीं है। किन्तु शुशा के लिये अन्य दो तीन अच्छे परिवर्तक हैं। यहां देखिये:

http://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE:%E0%A4%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%9F_%E0%A4%AA%E0%A4%B0_%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%95%E0%A5%87_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%A8#.E0.A4.AB.E0.A4.BE.E0.A4.A3.E0.A5.8D.E0.A4.9F_.E0.A4.AA.E0.A4.B0.E0.A4.BF.E0.A4.B5.E0.A4.B0.E0.A5.8D.E0.A4.A4.E0.A4.95_.28Font_Converters.29

राज भाटिय़ा said...

अनुनाद जी आप का धन्यवाद,मेरे लिये यह जानकारी बिलकुल नई हे,कई बार हमे फॉण्ट का पता नही होता तो उसे केसे परिर्बतन करे, यह जरुर बताये

Jeet said...

बहुत ही अच्छे लिंक दिये है भाई। बहुत बहुत धन्यवाद :)

Dr Prabhat Tandon said...
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Dr Prabhat Tandon said...

मुझे दैनिक हिन्दुस्तान

Dr Prabhat Tandon said...

अनुनाद जी मेरे कमेन्ट पूरे क्यूं नही दिख रहे , पहला वाला कमेन्ट मैने डीलीट किया , शायद गलती से छूट गया हो लेकिन दूसरा भी टूट गया ।

चन्द्रिका said...

anunad bhai shree lipi to unicode nahi hai so plz. load kar de to acchha hoga asha karate hai aap jald hi kar dege....

suraj said...

अनुनाद सिंह जी,
क्या आप हमारी प्रकाशक Dos Version से टाइप की तथा Ventura for DOS में Edit की फाइलों को Windows के लिए परिवर्तित करने का तरीका सुझा सकते हैं तथा यदि आप हमें Adobe Font Foundry for DOS प्राप्त करने का लिंक बतायें, उससे मुझे काफी मदद मिलेंगी। धन्यवाद

suraj said...
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akhil said...

अनुनाद भाई आपका यह प्रयाश बहुत अच्छा है. लेकिन मुझे एक और लिंक देने का कृपा करें. मुझे कन्नड़ से हिन्दी में कोई भी फॉण्ट में कन्वर्टर चाहिए. कृपया सुझाव देन.


आपका अखिलेश

चन्द्रिका said...

anunaad bhaai unicode-krutidev kam nahi kar raha hai plz. kuchh kare theek kare jaldi to behatar hoga hamare liye jo roj din me do-char chakkar lagata hai aapke paas

अनुनाद सिंह said...

चन्द्रिका जी,
आप द्वारा बतायी गयी लिंक को अद्यतन (अपडेट) कर दिया हूँ। चला कर देखिये।

Sandeep Poriya said...

सर आपक प्रयास बहुत ही सही है। आप·क प्रयास से हमे गति मिली है। क्या आप हमारी एक गणेशा फांट ·क कनर्वटर करने क विधि बता सकते हैं

Sandeep Poriya said...

सर आपक प्रयास बहुत ही सही है। आप·क प्रयास से हमे गति मिली है। क्या आप हमारी एक गणेशा फांट ·क कनर्वटर करने क विधि बता सकते हैं

Sarkar said...

anunad ji aapko Namashkar
aapke dwara uplabdh converters behad acche hain aur we behtar karya kar rahen hain. hindika chalan badhane ke liye aapke prayaas sarahniy hain hum inki karte hain. aaj aap aur hum jaise aur ye sabhi itne bhi hindi ke premi hain hum sab ko milkar hindi ko itna vistaar dena hai ki duniya HINDUSTAN ko jaan jaye aur bole ki Waah HINDUSTAN.
Jeetesh
naisarkar.blogspot.com

प्रवीण त्रिवेदी...प्राइमरी का मास्टर said...

बड़े काम के लिंक दिये हैं आपने। अनेकानेक धन्यवाद!!!!!!!!

infinite it solutions said...

अनुनाद सिंह जी,
meine appke diye huye like per kafi kamm kiya lekin mein kuch bhi result nahi mila. mein HTML file ko bhi download karke uska bhi use kiya. lekin muje koi success nahi mile. ab mein last mein app se help lena chataha hoon...
Meri problem hai ki mere pass chanakya font mein word docs hai(already typed)... ab muje un doces file ko Unicode doces mein change karke web per dalana hai... uske li appke app koi option hai to batao... mein net per isake liye 8-10 hours serach kae chuka hoon. lekin koi result nahi nikala. Please help me... Thanks in adv.

infinite it solutions said...
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kuldeep said...

hindi ko kaise likha jaye.

kuldeep said...

kya shree lipi ko krutidev me parivartit kiya ja sakta hai?

अविनाश वाचस्पति said...

अनुनाद जी

आपका फोंट नाद

हिन्‍दी वर्द्धक है

बबधाई।

Jonathan said...

anunadji,
krutidev010-to-Unicode converter04
krupya yah kam karna kab tak shuru kar dega.
Jonathan lal

Jonathan said...

पद्मश्री अवाॅर्ड की बंदरबांट
गणतंत्र दिवस पर इस बार बांटे गए पद्मश्री अवाॅर्डों को लेकर इस बार जैसी फजीहत सरकार को कभी भी नहीं करनी पड़ी। ओलंपिक में देश को पहली बार पदकों की तालिका में पहुंचाने के बावजूद मुक्केबाज सुशील कुमार और वीरेंदरसिंह को महरूम रहना पड़ा, वहीं जम्मू कश्मीर के निर्यातक को पद्मश्री अवाॅर्ड के लिए नामित कर दिया जाने से यही लगता है कि यदि जोड़-तोड़ की जाए तो यह अवाॅर्ड पाना भी अब कोई मुश्किल काम नहीं रह गया है।
इससे भी दिलचस्प बात यह है कि इस वर्ष मध्यप्रदेश के भाषाई समाचार पत्र नईदुनिया के मालिक और प्रधान संपादक रहे अभय छजलानी और इसी संस्था के वर्तमान प्रधान संपादक का काम देख रहे आलोक मेहता तक को पद्मश्री अवाॅर्ड से नवाजा गया है। दिलचस्प बात यह है कि इसी संस्था के एक पत्रकार ने गत वर्ष वर्तमान राष्ट्रपति महोदया श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल से इस संस्था द्वारा उसे परेशान किए जाने से त्रस्त होकर सपरिवार इच्छामृत्यु की याचना की थी, जिस पर संभवतः अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है, उल्टे पूर्व और वर्तमान संस्था प्रमुखों को पद्मश्री अवाॅर्ड से नवाज दिया गया है।
क्या इसका अर्थ यह नहीं लगाया जाना चाहिए कि यदि जोड़-तोड़ की कला में यदि कोई माहिर है तो फिर उसके लिए किसी भी तरह का सम्मान प्राप्त करने की कोई कमी नहीं है, भले ही वह पद्मश्री अवाॅर्ड या कोई अन्य अवाॅर्ड की क्यों न हो? मेरी कोशिष रहेगी कि अपने अगले ब्लाॅग में उस पत्रकार से संबंधित पूरी जानकारी सभी को दूं।

Jonathan said...

नईदुनिया के पत्रकार ने मांगी राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छामृत्यु की इजाजत

इंदौर से प्रकाशित मध्यप्रदेश के भाषाई समाचार पत्र नईदुनिया के अभय छजलानी और प्रधान संपादक आलोक मेहता को इस वर्ष गणतंत्र दिवस पर पद्मश्री से सम्मानित किए जाने के परिप्रेक्ष्य में यह जान लेना कम दिलचस्प नहीं होगा कि संस्था में कर्मचारियों का कॅरियर किस प्रकार तक चैपट कर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। संस्था ने एक कर्मचारी को इतना परेशान किया कि उसने मजबूर होकर राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी।
यहां के प्रबंधन का इस कर्मचारी से कहना था कि संस्था को समझदार लोगों की जरूरत नहीं है, वह इस्तीफा दे दे और दूसरी जगह नौकरी ढूंढ ले। जब इस कर्मचारी ने अपनी उम्र का हवाला देकर इस बारे में असमर्थता जताई तो उसका स्थानांतर कर दिया गया। यहीं से शुरुआत हुई इस कर्मचारी के बुरे दिनों की,, क्योंकि स्थानांतर किए जाने के कारण यह कर्मचारी अन्य किसी संस्था में नौकरी भी नहीं कर सकता।
राष्ट्रपति को की गई शिकायत में इसने अपने सारे दुखों का बयान कर उनसे सपरिवार इच्छामृत्यु चाही थी,, लेकिन इसकी यह शिकायत देश में मौजूद लालफीताशाही में उलझ कर रह गई और हाल-फिलहाल तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई, लेकिन संस्था प्रमुखों को पद्मश्री से नवाजा गया है, क्या यही लोकतंत्र है?
स्थानांतर के करीब एक साल बाद इस कर्मचारी ने यूनियन की तरफ से श्रम आयुक्त को बताया कि उसका स्थानांतर दुर्भावना से प्रेरित होकर किया गया है। श्रम आयुक्त ने इस मामले को 21/06/07 को श्रम न्यायालय को सुपुर्द कर दिया, लेकिन नईदुनिया प्रबंधन अपनी पहुंच और धन का इस्तेमाल करते हुए पेशी दर पेशी तारीखें आगे बढ़ा रहा है.
नईदुनिया प्रबंधन की हमेशा से नीति रही थी कि जिस भी कर्मी को नौकरी से निकालना हो, उसके सामने ऐसे हालात पैदा कर दो कि वह खुद ब खुद ही नौकरी छोड़ दे, लेकिन इस कर्मी के मामले में प्रबंधन गच्चा खा गया।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस कर्मी ने बीमार पिता का समुचित इलाज न करा पाने और कोई दूसरी राह नहीं सूझने पर राष्ट्रपति से सपरिवार इच्छामृत्यु की इजाजत मांग थी। आर्थिक मंदी और बेलगाम महंगाई के इस दौर में बिना किसी रोजगार के अब इस कर्मचारी के सामने अपने जीवन का निर्वाह ही अहम सवाल बना हुआ है।

इस कर्मचारी द्वारा राष्ट्रपति को भेजा गया सपरिवार इच्छामृत्यु संबंधी पत्र ज्यों का त्यों इस प्रकार है:-


सेवा में,
महामहिम राष्ट्रपति
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल महोदया,
राष्टपति भवन,
नई दिल्ली

विषय: सपरिवार इच्छामृत्यु की अनुमति देने बाबद।

महामहिम महोदया,
प्रार्थी कुलदीप शर्मा मध्यप्रदेश के भाषाई समाचार पत्र ‘नईदुनिया’ में वर्ष 1996 से कार्यरत है। नईदुनिया प्रबंधन ने दुर्भावना से प्रेरित होकर (यह जानते-बूझते कि मैं पारिवारिक कारणों से इंदौर से बाहर जाकर काम नहीं कर सकता हूं), मेरा स्थानांतर 7 नवंबर 05 को भोपाल कर दिया। स्थानांतर से संबंधित मेरा प्रकरण श्रम न्यायालय में गत वर्ष (प्रकरण क्रमांक 57/07 दिनांक 9/10/07 को) जवाबदावा देकर समाचार प़्ात्र कर्मचारी यूनियन इंदौर ने प्रस्तुत कर दिया लेकिन मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से नईदुनिया प्रबंधन द्वारा अभी तक श्रम न्यायालय में इसका जवाब ही पेश नहीं किया गया है।

लोकतंत्र का चैथा स्तंभ होने का नाजायज फायदा
नईदुनिया प्रबंधन द्वारा अनेक प्रकार से लोकतंत्र का चैथा स्तंभ होने का नाजायज फायदा गलतबयानी को आधार बनाकर लिया जा रहा है। प्रबंधन द्वारा गलतबयानी को अपना हथियार बनाने की पहली मिसाल मेरे द्वारा सहायक श्रमायुक्त को 31 अगस्त 2006 को की गई शिकायत पर नईदुनिया प्रबंधन द्वारा दिया गया जवाब है। इसमें ( प्रबंधन द्वारा दिए गए जवाबी पत्र के) शुरुआती पैरा में लिखा गया है कि इनका कार्य संतोषजनक नहीं रहा। इनके काम के बारे में ढेरों गलतियां/ शिकायतें आने लगीं...आदि।
सहायत श्रमायुक्त को संबोधित 2 अक्टूबर 06 के इसी पत्र के दूसरे पेज के अंत में (कंडिका 7 का जवाब देते हुए) प्रबंधन द्वारा लिखा गया है- जिनका नाम प्रार्थी ने लिखा है उनकी योग्यता व क्षमता शिकायतकर्ता की योग्यता व क्षमता के आगे नगण्य है। यह है नईदुनिया की गलतबयानी की पहली मिसाल जिसके अनुसार पिछले 40-45 वर्षों से यहां काम करने वालों की योग्यता व क्षमता मेरे मुकाबले नगण्य है। कहने का सीधा और आसान मतलब यह है कि मुझसे पहले के सभी कर्मी अयोग्य हैं (प्रति संलग्न है)।

गलतबयानी की दूसरी मिसाल
नईदुनिया प्रबंधन द्वारा गलतबयानी की दूसरी मिसाल है क्षेत्रीय भविष्यनिधि आयुक्त के समक्ष दिया गया यह कथन है कि मुझे 15/02/96 को बतौर अपें्रटिस रखा गया था। क्षेत्रीय भविष्यनिधि आयुक्त (ईआर) द्वारा प्रबंधन को जब अप्रेंटिस एक्ट 1961 के तहत स्टेंडिंग आॅर्डर की प्रति देने को कहा गया तो प्रबंधन द्वारा इसकी प्रति पेष नहीं की गई ( भविष्यनिधि आयुक्त के फैसले की प्रति संलग्न)।
मौके-बेमौके नईदुनिया प्रबंधन की इस तरह गलतबयानी से जाहिर है कि उसने परेशान, प्रताड़ित औश्र रोजी-रोटी से मोहताज करने के लिए जान-बूझकर मुझे ही स्थानांतर के लिए इसलिए चुना ताकि अपने पारिवारिक कारणों से मैं इंदौर शहर से बाहर नहीं जा सकूं और प्रबंधन की मंशानुरूप स्वेच्छा से त्यागपत्र दे दूं। नईदुनिया प्रबंधन पिछले लंबे समय से मुझ पर त्यागपत्र देने के लिए दबाव बनाए हुए था। 26 नवंबर 03 से 28 दिसंबर 03 की अवधि के दौरान भी मुझे जबरन काम करने से रोका गया था।

प्रबंधन ने कानून की जानकारी का फायदा उठाया
सारे प्रयासों के बावजूद मेरे त्यागपत्र नहीं देने पर नईदुनिया प्रबंधन ने कानून की इस जानकारी के आधार पर कि न्यायालय में स्थानांतर का केस यूनियन के माध्यम से ही लड़ा जा सकता है, मुझे स्थानांतर के लिए इसलिए भी चुन लिया क्योंकि मैं किसी यूनियन का सदस्य नहीं रहा था। यूनियन का सदस्य नहीं होने के कारण ही नवंबर 05 में स्थानांतरण होने के करीब 10 माह बाद (31 अगस्त 06 को) मैंने अपनी ओर से सहायक श्रमायुक्त कार्यालय में पहली औपचारिक षिकायत की थी।

पनपने नहीं दी यूनियन
नईदुनिया प्रबंधन ने लोकतंत्र का चैथा स्तंभ होन का इस्तेमाल कर पिछले 60 वर्षों में इतनी बड़ी संस्था में लोगों के कार्यरत होने के बावजूद संस्था में किसी यूनियन को इसलिए नहीं पनपने दिया ताकि वह अपनी मर्जी से ‘किसे नौकरी पर रखना है और किसे बाहर करना है’ का तानाशाहीपूर्ण रुख अख्तियार करना जारी रख सके।

आपसे सपरिवार इच्छामृत्यु चाहने का कारण
1. मेरी उम्र 46 वर्ष से अधिक हो जाने के कारण अब किसी अन्य संस्था द्वारा नौकरी दिया जाना संभव नहीं। उम्र के इस पड़ाव पर आकर कोई और या नई तरह की नौकरी अथवा धंधा कर पाना मुमकिन नहीं। इस कारण मैं नवंबर 05 से अभी तक मार्च 2008 (करीब 28 माह) तक बेरोजगार हूं।
2. इकलौते बेटे के बेरोजगार होने के सदमें से पिताजी सितंबर 06 से बिस्तर पर चले गए हैं। वे चलना-फिरना तो दूर उठने-बैठने से भी मोहताज हैं।
3. बिस्तर पर लगातार एक ही मुद्रा में लेटे रहने से उनकी पीठ, कूल्हे और पांव में शैयावृण (बेडसोर) हो गए हैं।
4. पुत्र होने के नाते मेरा दायित्व है कि मैं उन्हें इस तकलीफ से छुटकारा दिलाउं् (हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में यह व्यवस्था दी है कि माता-पिता की सेवा पुत्र का दायित्व है) लेकिन अंशदान जमा नहीं होने से राज्य बीमा चिकित्सा सुविधा मिलना बंद है।
5. आय का अन्य कोई स्रोत नहीं होने और पिछले 18 माह से पिताजी के इलाज में पैसा खर्च होने से सारी जमापूंजी समाप्त हो गई है।
6. एक तरफ नईदुनिया जैसी बड़ी संस्था और उसके आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने से वह अपनी पहुंच और पैसे के दम पर मुकदमे को लंबे समय तक खींच सकने में सक्षम है। इसका उदाहरण पिछले करीब 6 माह से श्रम न्यायालय में पेश जवाबदावे का जवाब ही नहीं दिया जाना है तो दूसरी तरफ महंगाई के लगातार बढ़ते जाने के साथ मौजूदा हालत में परिवार का गुजारा अहम प्रश्न है। परिवार को रोज तिल-तिलकर मारने से बेहतर है मृत्यु का वरण करना।
इन सब हालात के चलते मैं अपने पूरे होशो-हवास में आपसे सपरिवार इच्छामृत्यु की अनुमति देने की प्रार्थना करता हूं।
महामहिम महोदया आपसे निवेदन है कि शीघ्र ही इस प्रार्थना को स्वीकार कर हमें इच्छामृत्यु की अनुमति देने की कृपा करें।

धन्यवाद

प्रार्थी

(कुलदीप शर्मा)

Sanyam said...

Bhai hum aap ko shashtang parnam karte hain. ye tools ultimate hain.

vijay upadhyay said...

अनुनाद जी आप ने हिन्दी के लिए जो किया है वह आधुनिक पाणिनी के समकक्ष ले जाता है। लेकिन एक कष्ट है चाणक्य फांट को यूनीकोड में बदलने की सुविधा समाप्त कर दी है। मुझे चाणक्य में टाइप करने में आसानी होती है। क्रपया फिर से शुरू करने का कष्ट करें।
विजय लखनउ से।

sumit said...

आभार और धन्यवाद बस दो लफ्ज़ ही.

ajay said...

अनुनादजी, क्या आपके नाम का दुरूपयोग किया जा रहा है? यह सवाल इसलिए पूछ रही हूँ क्योंकि एक वेबपोर्टल पर आपके नाम पर जब क्लीक किया जाता है तो आपके ब्लॉग के स्थान पर कुछ और ही खुलने लगता है.

Sunil Sangwal said...

आपका ब्लॉंग पढ़ कर बहुत अच्छा लगा। यह एक अत्यंत सराहनीय काम है।
अमर उजाला व राजस्थान पत्रिका फ़ॉण्ट का परिवर्तक यहां पर भी है...
http://www.punjabpatrika.com/au2unicode.php
इसके परिणाम अपेक्षाकृत काफ़ी पसंद आये।

Irna India Blogs Post said...

अनुवाद जी,
हिन्दी में फाण्ड परिवर्तक प्रस्तुत करने का आपका कार्य अत्यन्त सराहनीय है। इससे क्षेत्र में काम करने वालों की आपने भारी दिक्कतों का समाधान कर दिया है। लेकिन, हमें चाणक्य फाण्ट को यूनीकोड में बदलने में कुछ कठिनाई आती है। फाण्ड बदलते समय क शब्द परिवर्तित नहीं होता है। इसके स्थान पर एक बिन्दु आ जाता है। क्या कारण है। कृपया सुझाव देने का कष्ट करें इसमें सुधार कैसे होगा।

सर्वेश कुमार सिंह
लखनऊ

Hetprakash vyas said...

kamal hai ye yantra

Prashant said...

Yaar Anuvad singh (HTCHANAK.TTF)हिन्दुस्तान चाणक्य se Chanakya mein kaise parivartit karein. bahut try karke dekha lekin kucch daaal gali nahi. htchanakya se unicode mein karke phine unicode se chanakya mein bhi karke dekha lekin jama nahi.

अनुनाद सिंह said...

प्रशान्त भाई,

जब आप हिन्दुस्तान चाणक्य से यूनिकोड करके फिर इसे चाणक्य में बदलते हैं तो क्या समस्या आ रही है? क्या नहीं जम रहा है? क्या आपको दो बार काम करना नहीं जम रहा है या कुछ और?

विस्तार से अपनी समस्या बताएँ। हो सके तो अपना ई-मेल भी लिखें।

Jagdeep S. Dangi said...

जय हिन्द,
लगभग 135 तरह के प्रचलित विभिन्न हिन्दी, संस्कृत और मराठी के फ़ॉण्ट को
100% शुद्धता के साथ यूनिकोड में परिवर्तन हेतु—
प्रखर देवनागरी फ़ॉट परिवर्तक हेतु लिंकः—

http://www.4shared.com/file/95233113/8580c800/DangiSoft_Prakhar_Devanagari_Font_Parivartak.html?s=1

Career7india.com said...

font converterbahut kam ki chij hai jo madadgar sabit hoti hai