25 November, 2014

विभिन्न विषयोँ के संस्कृत ग्रन्थ

गणित
  1. अज्ञात रचना -- जयदेव (गणितज्ञ), उदयदिवाकर की सुन्दरी नामक टीका में इनकी विधि का उल्लेख है।
  2. बीजपल्लवम् -- कृष्ण दैवज्ञ -- भास्कराचार्य के 'बीजगणित' की टीका
  3. बुद्धिविलासिनी -- गणेश दैवज्ञ -- भास्कराचार्य के 'लीलावती' की टीका
  4. सारसंग्रह गणितमु (तेलुगु) -- पावुलूरी मल्लन (गणितसारसंग्रह का अनुवाद)
  5. क्षेत्रसमास -- जयशेखर सूरि (भूगोल/ज्यामिति विषयक जैन ग्रन्थ)
  6. सद्रत्नमाला -- शंकर वर्मन ; पहले रचित अनेकानेक गणित-ग्रन्थों का सार
  7. सूर्य सिद्धान्त -- रचनाकार अज्ञात ; वाराहमिहिर ने इस ग्रन्थ का उल्लेख किया है।
  8. युक्तिभाषा या 'गणितन्यायसंग्रह' (मलयालम भाषा में) -- ज्येष्ठदेव
  9. गणितयुक्तिभाषा (संस्कृत में) -- रचनाकार अज्ञात
  10. लघुविवृति -- शंकर वारियर
  11. क्रियाक्रमकरी (लीलावती की टीका) -- शंकर वारियर और नारायण पण्डित ने सम्मिलित रूप से रची है।
  12. कर्मदीपिका -- परमेश्वर -- महाभास्करीय की टीका
  13. परमेश्वरी -- परमेश्वर -- लघुभास्करीय की टिका
  14. विवरण -- परमेश्वर -- सूर्यसिद्धान्त और लीलावती की टीका
  15. दिग्गणित -- परमेश्वर -- दृक-पद्धति का वर्णन (१४३१ में रचित)
  16. गोलदीपिका -- परमेश्वर -- गोलीय ज्यामिति एवं खगोल (१४४३ में रचित)
  17. वाक्यकरण -- परमेश्वर -- अनेकों खगोलीय सारणियों के परिकलन की विधियाँ दी गयी हैं।
  18. करणकौस्तुभ -- कृष्ण दैवज्ञ

संस्कृत के व्याकरण ग्रन्थ और उनके रचयिता

  1. संग्रह -- व्याडि (लगभग ई. पू. 400 ; व्याकरण के दार्शनिक विवेचन का आदि ग्रन्थ)
  2. वाक्यपदीय -- भर्तृहरि (लगभग ई. 500, व्याकरणदर्शन का सर्वोत्कृष्ट ग्रंथ)
  3. त्रिपादी (या, महाभाष्यदीपिका) -- भर्तृहरि (महाभाष्य की टीका)
  4. भट्टिकाव्य (या, रावणवध) -- भट्टि (सातवीं शती)
  5. कच्चान व्याकरण -- कच्चान (पालि का प्राचीनतम उपलब्ध व्याकरण)
  6. मुखमत्तदीपनी -- विमलबुद्धि (कच्चान व्याकरण की टीका तथा न्यास, 11वीं सदी)
  7. काशिकाविवरणपंजिका (या, न्यास) -- जिनेंद्रबुद्धि (लगभग 650 ., काशिकावृत्ति की टीका)
  8. पदमंजरी -- हरदत्त (. 1200, काशिकावृत्ति की टीका)
  9. भागवृत्ति (अनुपलब्ध, काशिका की पद्धति पर लिखित)
  10. भाषावृत्ति -- पुरुषोत्तमदेव (ग्यारहवीं शताब्दी)
  11. सिद्धान्तकौमुदी -- भट्टोजि दीक्षित (प्रक्रियाकौमुदी पर आधारित)
  12. प्रौढमनोरमा -- भट्टोजि दीक्षित (स्वरचित सिद्धान्तकौमुदी की टीका)
  13. शब्दकौस्तुभ -- भट्टोजि दीक्षित (. 1600, पाणिनीय सूत्रों की अष्टाध्यायी क्रम से एक अपूर्ण व्याख्या)
  14. बालमनोरोरमा -- वासुदेव दीक्षित (सिद्धान्तकौमुदी की टीका)
  15. रूपावतार -- धर्मकीर्ति (ग्यारहवीं शताब्दी)
  16. तत्वबोधिनी -- ज्ञानेन्द्र सरस्वती (सिद्धांतकौमुदी की टीका)
  17. शब्दरत्न -- हरि दीक्षित (प्रौढमनोरमा की टीका)
  18. मनोरमाकुचमर्दन -- जगन्नाथ पण्डितराज (भट्टोजि दीक्षित के "प्रौढ़मनोरमा" नामक व्याकरण के टीकाग्रंथ का खंडन)
  19. स्वोपज्ञवृत्ति -- (वाक्यपदीय की टीका)
  20. परिभाषेन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (इस यशस्वी ग्रंथ पर अनेक टीकाएँ उपलब्ध हैं।)
  21. लघुशब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (सिद्धान्तकौमुदी की व्याख्या)
  22. बृहच्छब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट (सिद्धान्तकौमुदी की व्याख्या)
  23. शब्देन्दुशेखर -- नागेश भट्ट
  24. उद्योत -- नागेश भट्ट (पतंजलिकृत महाभाष्य पर टीकाग्रंथ)
  25. गदा -- परिभाषेंदुशेखर की टीका
  26. भैरवी -- परिभाषेंदुशेखर की टीका
  27. भावार्थदीपिका -- परिभाषेंदुशेखर की टीका
  28. परिमल -- अमरचन्द

रसविद्या के प्रमुख ग्रन्थ

इस विद्या के संस्कृत में बहुत से ग्रन्थ हैं।
  1. रसप्रकाश -- यशोधर

आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ

इन्हें भी देखें- रसविद्या
  • वृहत्त्रयी :
* चरकसंहिता --- चरक
* सुश्रुतसंहिता --- सुश्रुत
* अष्टांगहृदय --- वाग्भट
  • लघुत्रयी :
* भावप्रकाश --- भाव मिश्र
* माधव निदान --- माधवकर
* भेलसंहिता -- भेलाचार्य

काव्यशास्त्र से सम्बन्धित ग्रन्थ

टीकाएँ

संगीत से सम्बंधित ग्रन्थ

  1. नाट्यशास्त्र -- भरत मुनि
  2. बृहद्देशीय -- मतंग मुनि
  3. नारदीय शिक्षा --
  4. संगीत मकरंद --
  5. सरस्वती हृदयालंकार -- मिथिला के राजा नान्यदेव (11वीं शती)
  6. अभिलषितार्थ चिंतामणि -- सोमेश्वर (12वीं शती)
  7. संगीतचूड़ामणि -- सोमेश्वर के पुत्र प्रतापचक्रवर्ती या जगदेकमल्ल (12वीं शती)
  8. संगीतसुधाकर -- चालुक्यवंशीय सौराष्ट्रनरेश महाराज हरिपाल (1175 ई.)
  9. संगीतरत्नावली -- सोमराज देव या सोमभूपाल (1180)
  10. गीतगोविन्द -- जयदेव (12वीं शती ई.)
  11. पंडिताराध्यचरितम् -- पाल्कुरिकि सोमनाथ (तेलगु में, 1270 ई.)
  12. संगीतरत्नाकर -- शार्ङ्गदेव (तेरहवीं शती)
  13. शृंगारहार -- शाकंभरि के राजा हम्मीर (लगभग 1300 ई.)
  14. संगीत-समय-सार -- जैन आचार्य पार्श्वदेव (लगभग 1300)
  15. संगीतसार -- विद्यारण्य (चौदहवीं शताब्दी)
  16. रागतरंगिणी -- लोचन कवि (पन्द्रहवीं शताब्दी)
  17. संगीतशिरोमणि -- अनेक पण्डितों का योगदान (मलिक सुलतान के आह्वान पर, पन्द्रहवीं शताब्दी)
  18. रसिकप्रिया -- मेवाड़ के महाराणा कुंभ (गीतगोविन्द की टीका, 1431-1469 ई.)
  19. संगीतराज -- महाराणा कुम्भ
  20. मानकुतूहल -- ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर (हिन्दी में, 15वीं शती)
  21. षड्रागचंद्रोदय -- पुण्डरीक विट्ठल (सोलहवीं शताब्दी)
  22. रागमाला -- पुण्डरीक विट्ठल
  23. रागमंजरी -- पुण्डरीक विट्ठल
  24. नर्तननिर्णय -- पुण्डरीक विट्ठल
  25. स्वरमेलकलानिधि -- कर्णाटक संगीत के विद्वान् रामामाला (1550 ई.)
  26. स्वरमेल कलानिधि -- रामामात्य (सोलहवीं शताब्दी)
  27. रागविबोध -- सोमनाथ (1609 ई.)
  28. संगीतसुधा -- तंजोर के राजा रघुनाथ (अपने मंत्री गोविंद दीक्षित की सहायता से 1620 ई. में)
  29. चतुर्दंडीप्रकाशिका -- व्यंकटमखी (सन् 1630 ई.)
  30. संगीतदर्पण -- दामोदर मिश्र (लगभग सन् 1630 ई.)
  31. हृदय प्रकाश -- हृदयनारायण देव (सत्रहवीं शताब्दी)
  32. हृदय कौतुकम् -- हृदयनारायण देव (सत्रहवीं शताब्दी)
  33. संग्रहचूड़ामणि -- गोविंद (1680-1700)
  34. संगीत पारिजात -- अहोबल (१७वीं शती)
  35. संगीत दर्पण -- दामोदर पण्डित
  36. अनूपविलास -- भावभट्ट
  37. अनूपसंगीतरत्नाकार --भावभट्ट
  38. अनुपांकुश --भावभट्ट
  39. संगीतसार -- जयपुर के महाराज प्रतापसिंह (1779-1804 ई.)
  40. अष्टोत्तरशतताललक्षणाम् -- सोमनाथ
  41. रागतत्वविबोध -- श्रीनिवास (18वीं शती)
  42. रागतत्वविबोध: -- श्रीनिवास पण्डित (अठारहवीं शताब्दी)
  43. संगीतसारामृतम् -- तंजोर के मराठा राजा तुलजेन्द्र भोंसले (18वीं शती)
  44. रागलक्षमण् -- तुलजेन्द्र भोंसले
  45. लक्ष्यसंगीतम्‌ -- विष्णु नारायण भातखंडे (संस्कृत ; 1910, १९३४)
  46. अभिनवरागमंजरी -- विष्णु नारायण भातखंडे (संस्कृत ; 1910, १९३४)
  47. हिंदुस्तानी संगीत पद्धति -- विष्णु नारायण भातखंडे (मराठी में)
  48. हिंदुस्तानी संगीत क्रमीक (छह भागों में) -- विष्णु नारायण भातखंडे
  49. संगीत तत्त्वदर्शक -- विष्णु दिगंबर पलुस्कर (20वीं शती)


प्रमुख वास्तुशास्त्रीय ग्रन्थ

३५० से भी अधिक ग्रन्थों में स्थापत्य की चर्चा मिलती है। इनमें से प्रमुख ग्रन्थ निम्नलिखित हैं-[1][2]
  • अपराजितपृच्छा (रचयिता : भुवनदेवाचार्य ; विश्वकर्मा और उनके पुत्र अपराजित के बीच वार्तालाप)
  • ईशान-गुरुदेवपद्धति
  • कामिकागम
  • कर्णागम (इसमें वास्तु पर लगभग ४० अध्याय हैं। इसमें तालमान का बहुत ही वैज्ञानिक एवं पारिभाषिक विवेचन है।)
  • मनुष्यालयचंद्रिका (कुल ७ अध्याय, २१० से अधिक श्लोक)
  • प्रासादमण्डन (कुल ८ अध्याय)
  • राजवल्लभ (कुल १४ अध्याय)
  • तंत्रसमुच्चय
  • वास्तुसौख्यम् (कुल ९ अध्याय)
  • विश्वकर्मा प्रकाश (कुल १३ अध्याय, लगभग १३७४ श्लोक)
  • विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र (कुल ८४ अध्याय)
  • सनत्कुमारवास्तुशास्त्र
  • वास्तुमण्डन
  • मयशास्त्र (भित्ति सजाना)
  • बिम्बमान (चित्रकला)
  • शुक्रनीति (प्रतिमा, मूर्ति या विग्रह निर्माण)
  • सुप्रभेदगान Suprabhedagana
  • आगम (इनमें भी शिल्प की चर्चा है।)
  • ब्रह्मपुराण (मुख्यतः वास्तुशास्त्र, कुछ अध्याय कला पर भी)
  • वास्तुविद्या
  • प्रतिमालक्षणविधानम्
  • गार्गेयम्
  • मानसार शिल्पशास्त्र (कुल ७० अध्याय; ५१०० से अधिक श्लोक; कास्टिंग, मोल्डिंग, कार्विंग, पॉलिशिंग, तथा कला एवं हस्तशिल्प निर्माण के अनेकों अध्याय)
  • अत्रियम्
  • प्रतिमा मान लक्षणम् (इसमें टूटीई हुई मूर्तियों को सुधारने आदि पर अध्याय है।)
  • दशतल न्याग्रोध परिमण्डल
  • शम्भुद्भाषित प्रतिमालक्षण विवरणम्
  • मयमतम् (मयासुर द्वारा रचित, कुल ३६ अध्याय, ३३०० से अधिक श्लोक)
  • बृहत्संहिता (अध्याय ५३-६०, ७७, ७९, ८६)
  • शिल्परत्नम् (इसके पूर्वभाग में 46 अध्याय कला तथा भवन/नगर-निर्माण पर हैं। उत्तरभाग में ३५ अध्याय मूर्तिकला आदि पर हैं।)
  • युक्तिकल्पतरु (आभूषण-कला सहित विविध कलाएँ)
  • शिल्पकलादर्शनम्
  • समरांगण सूत्रधार (रचयिता ; राजा भोज ; कुल ८४ अध्याय, ८००० से अधिक श्लोक)
  • वास्तुकर्मप्रकाशम्
  • कश्यपशिल्प (कुल ८४ अध्याय तथा ३३०० से अधिक श्लोक)
  • भविष्यपुराण (मुख्यतः वास्तुशिल्प, कुछ अध्याय कला पर भी)
  • अलंकारशास्त्र
  • अर्थशास्त्र (खिडकी एवं दरवाजा आदि सामान्य शिल्प, इसके अलावा सार्वजनिक उपयोग की सुविधाएँ)
  • चित्रकल्प (आभूषण)
  • चित्रकर्मशास्त्र
  • मयशिल्पशास्त्र (तमिल में)
  • विश्वकर्मा शिल्प (स्तम्भों पर कलाकारी, काष्ठकला)
  • अगत्स्य (काष्ठ आधारित कलाएँ एवं शिल्प)
  • मण्डन शिल्पशास्त्र (दीपक आदि)
  • रत्नशास्त्र (मोती, आभूषण आदि)
  • रत्नपरीक्षा (आभूषण)
  • रत्नसंग्रह (आभूषण)
  • लघुरत्नपरीक्षा (आभूषण आदि)
  • मणिमहात्म्य (lapidary)
  • अगस्तिमत (lapidary crafts)
  • अनंगरंग (काम कलाएँ)
  • रतिरहस्य (कामकलाएँ)
  • कन्दर्पचूणामणि (कामकलाएँ)
  • नाट्यशास्त्र (फैशन तथा नाट्यकलाएँ)
  • नृतरत्नावली (फैशन तथा नाट्यकलाएँ)
  • संगीतरत्नाकर]] ((फैशन, नृत्य तथा नाट्यकलाएँ)
  • नलपाक (भोजन, पात्र कलाएँ)
  • पाकदर्पण (भोजन, पात्र कलाएँ)
  • पाकविज्ञान (भोजन, पात्र कलाएँ)
  • पाकार्नव (भोजन, पात्र कलाएँ)
  • कुट्टनीमतम् (वस्त्र कलाएँ)
  • कादम्बरी (वस्त्र कला तथा शिल्प पर अध्याय हैं)
  • समयमात्रिका (वस्त्रकलाएँ)
  • यन्त्रकोश (संगीत के यंत्र Overview in Bengali Language)
  • संगीतरत्नाकर (संगीत से सम्बन्धित शिल्प)
  • चिलपटिकारम् (Cilappatikaaram ; दूसरी शताब्दी में रचित तमिल ग्रन्थ जिसमें संगीत यंत्रों पर अध्याय हैं)
  • मानसोल्लास (संगीत यन्त्रों से सम्बन्धित कला एवं शिल्प, पाकशास्त्र, वस्त्र, सज्जा आदि)
  • वास्तुविद्या (मूर्तिकला, चित्रकला, तथा शिल्प)
  • उपवन विनोद (उद्यान, उपवन भवन निर्माण, घर में लगाये जाने वाले पादप आदि से सम्बन्धित शिल्प)
  • वास्तुसूत्र (संस्कृत में शिल्पशास्त्र का सबसे प्राचीन ग्रन्थ; ६ अध्याय; छबि रचाना; इसमें बताया गया है कि छबि कलाएँ किस प्रकार हाव-भाव एवं आध्यात्मिक स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के साधन हैं।)



प्राचीन कृषि ग्रन्थ

सुभाषित संग्रह

क्रमांक
रचना
संग्रहकर्ता
काल
1
सुभाषितरत्नकोश
विद्याकर
१२वीं शताब्दी
2
सुभाषितावली
कश्मीर के वल्लभदेव
प्रायः ५वीं शताब्दी
3
सदुक्तिकामृत
श्रीधरदास
१२०५
4
सूक्तिमुक्तावली
जल्हण
१३वीं शताब्दी
5
सार्ङ्गधर पद्धति
सार्ङ्गधर
१३६३ ई
6
पद्यावली
अज्ञात
-
7
सूक्तिरत्नहार
सूर्यकलिंगारय
१४वीं शताब्दी
8
पद्यवेणी
वेणीदत्त
-
9
सुभाषितानिवि
वेदान्त देशिक
१५वीं शताब्दी
10
पद्यरचना
लक्ष्मण भट्ट
१७वीं शताब्दी के आरम्भ में
11
पद्य अमृत तरंगिणी
हरिभास्कर
१७वीं शताब्दी का उत्तरार्ध
12
सूक्तिसौन्दर्य
सुन्दरदेव
१७वीं शताब्दी का उत्तरार्ध