06 December, 2005

नया चर्चा-समूह : सशक्त भारत

आजकल चतुर्दिक में किसकी चर्चा है ? कौन सबसे तेज विकास कर रहा है ? किसका विकास विकसित देशों को भयभीत कर रहा है ?

आजकल रोज भारत और चीन के तीव्र विकास और उनके भविष्य के "सुपरपावर" बनने के शुभ समाचार पढने-सुनने को मिलते रहते हैं | इससे भारत में आशा की एक नयी लहर आ गयी है | जो लोग इस देश के प्रति प्रचण्ड निराशावादी थे , वे भी पाला बदलने लगे हैं |

इसी उत्साह्पूर्ण माहौल को समझने और आपस में बाँटने के उद्देश्य से मैने एक नया चर्चा-समूह बनाया है - सशक्त भारत | आप सभी से निवेदन है कि आप भी इस पर भारत के विकास से संबन्धित समाचारों को पोस्ट करते रहें , ताकि यह् समूह भारत के विकास के समाचारों से परिपूर्ण एक सम्पूर्ण साइट बन जाय | इससे माहौल को और खुशनुमा बनाने मे मदद मिलेगी | हम सभी लोग विकास के समाचारों से अधिकाधिक अवगत रहेंगे | सूचना-सम्पन्न ही शक्ति-सम्पन्न माना जाता है | सूचना-सम्पन्नता ( किसी सिस्टम के सम्पूर्ण ज्ञान ) से उस सिस्टम के उन बिन्दुओं का पता चलता है जहाँ अधिक "लीवरेज्" मिल सकता है ( कम प्रयत्न से अधिक लाभ ) | यही तो प्रगति का "मूल-मंत्र" है | इससे हिन्दी में इस तरह की अन्य चर्चाओं को भी बढावा मिलेगा |

कौन जाने जब विकसित भारत का इतिहास लिखा जाय , तब इस चर्चा-समूह की भी चर्चा हो |

30 November, 2005

क्या विश्व में हिन्दीभाषियों की संख्या सर्वाधिक है

नागरी लिपि परिषद के पत्रिका "नागरी संगम" के ताजा अंक मे एक शोधपत्र के बारे में सूचना प्रकाशित हुई है I इसके अनुसार, बोलने वालों की संख्या के आधार पर हिन्दी विश्व में प्रथम स्थान पर है I वैसे यह एक बहुत ही विवादास्पद, जटिल और अस्पष्ट विषय है तथा अलग-अलग श्रोत अलग-अलग आकडे प्रस्तुत करते रहे हैं I

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26 November, 2005

अनुगूँज १५ - हम फिल्में क्यूँ देखते हैं ?

Akshargram Anugunj सबसे बडा कारण है फिल्मों का श्रव्य-दृष्य माध्यम होना । सर्वविदित है कि दृष्य माध्यम सर्वाधिक कारगर माध्यम है । श्रव्य और पाठ्य माध्यम इससे हजारो गुना कम कारगर हैं । एक मूढ मस्तिष्क भी , और यहाँ तक कि एक पशु भी, किसी दृष्य से बहुत सारी सामग्री ग्रहण कर लेता है ।

दूसरा कारण है फिल्म में बहुत सी विधाओं का घालमेल या मिश्रण का होना । फिल्म में सौन्दर्य उपासकों के लिये सेक्स होता है, कला के पारखियों के लिये अभिनय मिलता है, साहित्य-प्रेमियों को रोचक संवाद सुनने को मिलता है , चोर-उचक्कों को उनके व्यवसाय के गुर प्राप्त होते हैं, महिलाओं और फैशन-परस्तों को नये-नये डिजायन के वस्त्राम्बर देखने को मिलते हैं ।

इसका एक तकनीकी कारण भी है । वैसे चल-चित्रों के आये हुए बहुत दिन हो गये , लेकिन चित्रों का चलना अब भी अधिसंख्य लोगों के लिये कौतूहल का विषय है । बहुत से लोग इस कौतूहल के वजह से भी फिल्में देखे जा रहे हैं । किसी ने खूब कहा है कि कोई आदमी किसी विचार के समर्थन में अपना प्राण भी दे सकता है बशर्ते वह विचार उसको पूरी तरह समझ मे न आया हो ।