24 January, 2005

संतों भाई , आइ ज्ञान की आँधी रे

कभी अपने कबीर साहब को ज्ञान की आँधी से साक्षात्कार हुआ था | अब तो सारा संसार ही इस आंधी की चपेट मे है |

पर यह आंधी अलग तरह की है | इस आंधी मे अपूर्व वेग और प्रचण्ड शक्ति है | सारा विश्व इसके साथ उडता चला जा रहा है | इन्टरनेट , डिजिटल लायब्रेरी , विकिपेडिया , चर्चा समूह , सर्च इंजन इत्यादि उसके अंग प्रत्यंग हैं |

साफ्ट्वेयर इतना सर्वब्यापी और सशक्त हो गया है कि कभी-कभी "अयमेव आत्मा" का भ्रम उत्पन्न कर देता है |
और कभी लगता है यह अलादीन का चिराग है , जो सोचो वह करके दिखाता है |

आप कुछ नया करना चाहते हैं , जरा खोज लीजिये | कोइ पहले ही कर चुका हो तो इसमे आश्चर्य की कोइ बात नही है | आपको कुछ करने मे कोइ समस्या आ रही है ? अपने आस-पास मत देखिये | लिख भेजिये किसी उपयुक्त चर्चा-समुह मे | कहीं सुदूर बैठा कोइ इसका समाधान कर देगा , वो भी घंटे-दो घंटे में |

यह आंधी सारे तौर तरीके बदल देगी| सब परिभाषायें बदल जायेंगी | शिक्षा और शिक्षण बदल जायेगा | शिक्षक और शिक्षर्थी बदल जायेंगे | ... इस सन्सार की काया ही पलट जायेगी , और सारा सन्सार यही जपेगा-

|| ज्ञानम ब्रम्ह ||

1 comment:

अनूप शुक्ला said...

आंधी में सारी भ्रान्तियां उड न जायें कहीं.बहुत दिन से चल रही है .