10 June, 2007

दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि का गणित

सामान्य अर्थ में जब किसी चीज की वृद्धि बहुत तेज होती है तो कहते हैं कि उसमे दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि हो रही है। इस वृद्धि का अपना ही गणित है जो रोचक होने के साथ-साथ बहुत ही उपयोगी भी है।

गणित की भाषा में इस तरह की वृद्धि को चरघातांकी वृद्धि (exponential growth) कहते हैं। इस वृद्धि की विशेषता है कि किसी राशि के वृद्धि की दर उस राशि के उस समय के परिमाण के समानुपाती होती है। एक सीमा के बाद यह वृद्धि इतनी तेज गति से होती है कि यह समझने में कठिन होने के साथ-साथ अविश्वसनीय भी बन जाती है।

इक्सपोनेंशियल वृद्धि पर एक रोचक किस्सा सुनने को मिलता है। माना जाता है कि शतरंज का आविष्कार भारत मे हुआ होगा। एक बार किसी राजा ने शतरंज के जानकार किसी साधु से शतरंज सीखने की इच्छा व्यक्त की। साधु ने शीघ्र ही राजा को शतरंज में प्रवीण बना दिया। जब दक्षिणा की बात आयी तो साधु ने कहा: "मुझे आप शतरंज के चौसठ(६४) खानों के नाम पर किसी अन्ना का दाना दीजिये और शर्त ये है कि पहले खाने के नाम पर एक दाना, दूसरे खाने के नाम पर दो दाना, तीसरे के नाम पर चार दाना, चौथे के नाम पर आठ दाना... देना होगा; अर्थात किसी खाने के नाम पर जितने दाने दिये हैं, अगले खाने के लिये उसके दूना दाना देना पड़ेगा।

राजा को यह दक्षिणा बहुत तुच्छ लगी। और गणना कर-करके दाने दिए जाने लगे। शुरू-शुरू में (पन्द्रह-बीस खानो तक) तो यह मजाक जैसा लग रहा था, किन्तु जैसे-जैसे बड़े नम्बर के खाने की बारी आने लगी राजा को स्प्ष्ट हो गया कि यह दक्षिना देना उसके लिये कठिन ही नही असम्भव भी है।

गणित की दृष्टि से देखें तो दाने 1 2 4 8 16 .. आदि दिये जाने थे जो एक गुणोत्तर स्रेणी(Geometric Progression) है। जानते हैं कि चौसठवें खाने के नाम पर कितने दाने देने पड़ेंगे? २ के उपर ६३ घात के बराबर जिसका मान है - ९२२३३७२१३६८५४७७५८०८. यदि मान लें कि २० दानों का भार लगभग १ ग्राम है तो चौसठवें खाने के नाम पर लगभग ४६११६८६०१८४२७ क्विंटल अन्न बनता है। क्या यह दक्षिणा राजा के लिये दान करना सम्भव है?
चक्रवृद्धि ब्याज (compound interest) पर जमा की गयी पूंजी या लिया गया ऋण की वृद्धि भी इक्सपोनेन्शियल ही होती है। किसी बच्चे के जन्मते ही उसके नाम से केवल १०० रूपये जमा कर दें और उस पर २५% वार्षिक की दर से चक्रवृद्धि ब्याज मिले तो ५२ वर्ष की उम्र में वह करोड़पति बन जायेगा। यदि २५% बहुत अधिक ब्याज लगता है तो यदि १०% का चक्रवृद्धि ब्याज भी मिले तो १०० वर्ष की उम्र में वह तेरह लाख का स्वामी होगा। इसी को वित्तीय हल्कों में पावर आफ कम्पाउंडिंग (power of compounding) कहते है। इसी को आठवां आश्चर्य भी कहा जाता है। बड़े-बड़े लोग इसी बात को आधार बनाकर सलाह देते हैं कि धनी बनने के लिये अपने जीवन में जल्दी इन्वेस्ट करना आरम्भ कर दो और बार-बार इन्वेस्ट करते रहो, यही धनी बनने का मूल मंत्र है।

इक्सपोनेन्शियल वृद्धि और एक समान वृद्धि (linear growth) का अन्तर स्पष्ट करने के लिये एक और उदाहरण दिया जाता है।

एक आदमी के दो बेटे थे। बड़े बेटे का खाता उसने सौ रूपये से खोला और प्रति माह उसमे १०० रूपये और जमा करता गया। छोटे बेटे का खाता उसने केवल १ रूपये से खोला किन्तु इसके बाद हर महीने पिचले महीने में जमा राशि का दोगुना जमा करता गया, यानि दूसरे महीने दो रुपया, तीसरे महीने चार रूपया, चौथे महीने आठ रूपये.. आदि। एक वर्ष बाद किसके खाते में ज्यादा धन होगा? क्या आप देख सकते हैं कि छोटा बेटा शीघ्र ही मालामाल हो जायेगा?

इक्स्पोनेन्शियल वृद्धि का कमाल और भी अनेकों जगह देखने को मिलता है। परमाणु बम(atom bomb) इक्सपोनेन्शियल वृद्धि का ही कमाल है। चेचक, हैजा, एड्स आदि महामारियाँ विषाणुओं (virus) के इक्सपोनेन्शियल वृद्धि का ही परिणाम हैं। इन्टरनेट के कारण सूचना का विस्फोट (information explosion) भी इक्सपोनेन्शियल ही है। सेमीकंडक्टर तकनीक में उन्नति के कारण कम्प्यूटिंग पावर भी इसी तरह की वृद्धि है। मल्टी-लेवेल मार्केटिंग ( एम-वे को जानते हैं?) में भी सदस्य संख्या इक्सपोनेन्शियल ही बढ़ती है। यही कारण है कि बाद वालों को सदस्य बनाने में नानी याद आ जाती है जबकि जो इस शृंखला में पहले घुस जाते हैं वे मलाई चाटते नजर आते हैं। विकिपेडिया और ब्लाग का प्रसार भी इक्सपोनेन्शियल हो रहा है।

6 comments:

Sagar Chand Nahar said...

बहुत सुन्दर विश्लेषण किया आपने।

Shrish said...

आज ये गणित करने का ख्याल कहाँ से आया। :)

चलो इसी बहाने आपने फिर लिखना तो शुरु किया।

अनूप शुक्ला said...

बहुत खूब!

संजय बेंगाणी said...

अच्छा गणित है

Udan Tashtari said...

हमें तो गणित के नाम से भी बेहोशी आने लगती है और आप इतना कुछ कर गये.

हरिराम said...

बहुत खूब! खेती करना भी तो कुछ ऐसा ही गणित होगा न। एक बीज बोओ, लाखों करोड़ों बीच वापस मिलेंगे।

कम्प्यूटर भी तो बिट, बाइट, 8बिट ASCII, 16 बिट यूनिकोड, 32बिट प्रोसेसिंग, 64 बिट .... के आधार पर ही तो काम करता है।

अगर यह घात द्विघात न होकर त्रिघात या चतुर्घात या पंचघात या पञ्चआयामी होगी तो परिकल्पना कैसी होगी?