06 January, 2008

हे गुलाम, चिरंजीव !

कहते हैं कि खोटा सिक्का ज्यादा चलता है; अंग्रेजी इसका सबसे सटीक प्रमाण है

इस लेख में मैने अंग्रेजी की महान कमियों का संक्षिप्त परिचय देने का प्रयास किया हैभारत का भी अंग्रेजी केजाल से बाहर निकलना बहुत जरूरी हैइसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिये यह संकलन किया गया है



अंग्रेजी भाषा की महान कमियाँ:
(English sucks. There's no denying it.)

) स्पेलिंग की समस्या

) उच्चारण की समस्या

) एक्सेंट की समस्या

) जितने अंग्रेज उतनी बोलियाँ (dilects)

) अंग्रेजी मुहावरों की समस्या (idioms and phrases)
एक गैर-अंग्रेजी भाषी यदि पूरी डिक्शनरी भी रट ले तो भी मुहावरों से भरी अंग्रेजी सुनकर बगली झांकने के लिए मजबूर हो सकता हैइसका कारण है कि मुहावरों का अर्थ उन शब्दों के अर्थ से कोई सम्बन्ध नहीं रखता जिनसे मिलकर वह मुहावरा बना हुआ है

) एक विचार के लिये कई शब्द, कई विचारों के लिये एक ही शब्द

7) कठिन शब्दावली की समस्या
( बेसिक इंग्लिश ,
प्लेन इंग्लिश , सिम्प्लिफ़ायड इंग्लिश )

8) कठिन ग्रामर की समस्या




अंग्रेजी स्पेलिंग के दोष

एक वर्ण, अनेक ध्वनियाँ ( उच्चारण)
on once - only - woman women worry
[wunce] [oanly] [wooman] [wimmen] [wurry]


एक ध्वनि के लिये अनेक वर्ण
peep - leap, people, here, weird, chief, police, me, ski, key;


इस कारण इंग्लिश जैसे लिखी है वैसे पढ़ी नहीं जाती और जैसे बोली जाती है वैसे लिखी नहीं जाती(या स्पेल नहींकी जाती)। अंग्रेजी को पढ़ पाने की मध्यम दर्जे की दक्षता प्राप्त करने के लिये ही लगभग ३७०० शब्दों की उटपटांग स्पेलिंग रटनी पड़ती है



अंग्रेजी स्पेलिंग के दुष्प्रभाव और हानियाँ:

) स्पेलिंग रटने में समय की बर्बादी

) डिक्शनरियों पर अनावश्यक कागज और पैसे की बर्बादी

) उच्चारण बताने के लिये अलग से व्यवस्था करनी पड़ती है; जैसे, किसी अन्य लिपि (जैसे आइ पी ) का सहारा लेना पड़ता हैकिन्तु यहाँ भी कोई मानक नहीं हैअधिकांश ब्रिटिश शब्दकोश IPA का प्रयोग करते हैं, किन्तु अमेरिकन डिक्शनिरियाँ अपने अलग ही पद्धति का अनुसरण करती हैं

) हाल ही में किये गये कुछ सर्वे और अनुसंधान यह साबित करते हैं कि अंग्रेजी स्पेलिंग की दूरूहता, यूके और यूएस में निरक्षरता का मुख्य कारण है

) दूसरे अल्फाबेट में लिखे जाने वाली भाषाओं को लिखने-पढ़ने की मूल चीजें सीखने में जितना समय लगता है , उससे लगभग तीन गुना समय उतनी ही अंग्रेजी सीखने में एक एक मध्यम बुद्धि का अंग्रेजी -भाषी बच्चे को लगाना पड़ता है। (
Seymour, British Journal of Psychology, 2003)

) पिछले पाँच दशकों में अंग्रेजी-भाषी देशों अनेक सर्वे हुए हैंइन सभी के निष्कर्ष इस से यह बात स्थापित होगयी है कि लगभग आधे अंग्रेजी-भाषी लिखने में अत्यधिक कठिनाई अनुभव करते हैंयहाँ तक कि लगभग बीस प्रतिशत अंग्रेजी-भाषी ठीक से पढ़ने में भी अक्षम हैंयह बात सन २००५ में यूके की हाउस आफ कामन्स की शिक्षा पर स्थापित एक समिति की रिपोर्ट कहती है

) एक मोटे अंदाज के अनुसार स्पेलिंग की दूरूहता के कारण केवल शिक्षा के क्षेत्र में प्रति वर्ष लगभग १०० बिलियन डालर की बर्बादी होती हैइसमें बार-बार डिक्शनरी के दर्शन की कीमत, गलत स्पेलिंग के कारण बर्बादहुए कागज की कीमत और स्पेलिंग के वजह से उत्पन्न हुई निरक्षरता की (अगण्य) कीमत शामिल नहीं है





अंग्रेजी स्पेलिंग सुधार के लिये प्रस्तावित कुछ उपाय

) शेवियन (Shavian) लिपि , क्विकस्क्रिप्ट

) फोनेटिक रोमन (Phonetic Roman)

) विस्तारित लैटिन (Extended Latin)

) देवग्रीक (Devagreek)
हाल ही में अन्तरजाल पर देवनागरी के बारे में कुछ जानकारी खोजते समय देवग्रीक नामक एक नये कांसेप्ट सेपरिचय हुआदेवग्रीक (Devagreek) , अंग्रेजी स्पेलिंग में सुधार के लिये प्रस्तावित एक वर्णमाला है जो रूप-रंगमें रोमन से मिलती-जुलती है किन्तु देवनागरी की ध्वन्यात्मक वरणमाला से अनुप्राणित है

) स्पेलिंग का सरलीकरण (simplified spelling)


इतनी कमियों के बावजूद अंग्रेजी का भारत में चलन पञ्चतंत्र की इन सूक्तियों को सार्थक सिद्ध करता है:

इह लोके हि धनिनां, परोऽपि स्वजनायते
स्वजनोपि दरिद्राणां, सर्वदा दुर्जनायते ।।

( इस संसार में पराया भी धनियों का अपना बन जाता हैदरिद्रों के स्वजन भी सदा दुर्जन जैसा व्यवहार करते हैं


पूज्यते यद् अपूज्योऽपि, यद् अगम्योऽपि गम्यते
वंद्यते यद् अवंद्योऽपि , प्रभावो धनस्य ।।

(धन का इतना प्रभाव है कि जो अपूज्य है वह भी पूजा जाता है; जिसके पास नहीं जाना चाहिये, उसके पास भीलोग जाते हैं; जो वंदना करने लायक नहीं है उसकी भी वन्दना की जाती है)




कुछ महत्वपूर्ण लिंक :

१) English sucks. There's no denying it.

२) Does English have an alphabet?

) English Spelling Reform Links

४) English spelling reform Link page

५)
The Strange English Language: Funny Things about English

६) English is very strange.

७) The strange English language

2 comments:

Suresh Chiplunkar said...

एकदम सटीक और जानकारीपूर्ण लेख
चुपके-चुपके फ़िल्म याद आ गई… जिसमें धर्मेन्द्र पूछते हैं… to टू, do डू तो फ़िर go गू क्यों नहीं? या फ़िर cut कट, but बट तो फ़िर put पट क्यों नहीं ? अंग्रेजी प्रेमी इसे अन्यथा न लें…

शास्त्री जे सी फिलिप् said...

बहुत सही, सटीक, एवं सामयिक विश्लेषण. खास कर उन लोगों के लिये जो हमेशा दुहाई देते रहते हैं कि हिन्दी कठिन है एवं अंग्रेजीमाता बडी सरल है.

जार्ज बर्नार्ड शा ने एक बार कहा था कि अंग्रेजी का उच्चारण ऐसे बेढंगा है कि GHOTI का उच्चारण होगा FISH !!

देखें कि कोई पाठक बूझ सकता है क्या कि ऐसा कैसे होगा ??