tag:blogger.com,1999:blog-10323440.post4235984877643126091..comments2008-01-06T22:47:38.981+05:30Comments on प्रतिभास: हे गुलाम, चिरंजीव !अनुनाद सिंहhttp://www.blogger.com/profile/05634421007709892634noreply@blogger.comBlogger2125tag:blogger.com,1999:blog-10323440.post-42123004699579710812008-01-06T22:47:00.000+05:302008-01-06T22:47:00.000+05:30बहुत सही, सटीक, एवं सामयिक विश्लेषण. खास कर उन लोग...बहुत सही, सटीक, एवं सामयिक विश्लेषण. खास कर उन लोगों के लिये जो हमेशा दुहाई देते रहते हैं कि हिन्दी कठिन है एवं अंग्रेजीमाता बडी सरल है. <BR/><BR/>जार्ज बर्नार्ड शा ने एक बार कहा था कि अंग्रेजी का उच्चारण ऐसे बेढंगा है कि GHOTI का उच्चारण होगा FISH !!<BR/><BR/>देखें कि कोई पाठक बूझ सकता है क्या कि ऐसा कैसे होगा ??शास्त्री जे सी फिलिप्http://www.blogger.com/profile/00286463947468595377noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-10323440.post-75681770303536710442008-01-06T20:46:00.000+05:302008-01-06T20:46:00.000+05:30एकदम सटीक और जानकारीपूर्ण लेखचुपके-चुपके फ़िल्म याद...एकदम सटीक और जानकारीपूर्ण लेख<BR/>चुपके-चुपके फ़िल्म याद आ गई… जिसमें धर्मेन्द्र पूछते हैं… to टू, do डू तो फ़िर go गू क्यों नहीं? या फ़िर cut कट, but बट तो फ़िर put पट क्यों नहीं ? अंग्रेजी प्रेमी इसे अन्यथा न लें…Suresh Chiplunkarhttp://www.blogger.com/profile/02326531486506632298noreply@blogger.com