01 January, 2014

भाषाओं की विचित्र बातें


माना जाता है कि पूरी दुनिया में करीब 5000 भाषाओं का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें से 1652 भाषाएँ सिर्फ़ भारत में हैं। लेकिन दुनिया के अधिकांश लोग करीब 500 भाषाओं का ही इस्तेमाल करते हैं। इनमें से सिर्फ़ 300 भाषाएँ ही ऐसी हैं, जिनकी अपनी लिपियाँ हैं। दुनिया की 5000 भाषाओं में से करीब-करीब आधी भाषाएँ लुप्त होने के कगार पर हैं। यह माना जाता है कि आजकल हर दो हफ़्ते में पृथ्वी पर से एक भाषा गायब हो रही है। लेकिन ऐसी भी भाषाएँ हैं, जिन्हें लिपि के आधार पर फिर से पुनर्जीवित कर दिया गया। यहूदी भाषा ऐसी ही भाषा है, जिसे हिब्रू भी कहा जाता है। भाषा वैज्ञानियों के अनुसार तबासरान भाषा सबसे मश्किल भाषा है। यह रूस के दगिस्तान प्रदेश में बोली जाती है। इस भाषा में 44 कारक हैं जितने पूरी दुनिया में किसी भी भाषा में नहीं हैं। चीनी भाषा भी बेहद मुश्किल भाषा है। यह चित्र-लिपि है और करीब 2 करोड़ चित्र इस भाषा को पूरी तरह सीखने के लिये याद करने पड़ते हैं। हवाई द्वीपों की भाषा "हवाई" सब से सरल है। उसमें सिर्फ़ 6 व्यंजन और 5 स्वर होते हैं। ग्रीनलैण्ड के एस्कीमो जाति के निवासियों की भाषा दुनिया की सबसे शिष्ट भाषा मानी जाती है। इस भाषा में एक भी कठोर शब्द, एक भी ग़ाली नहीं है। अँग्रेज़ी सीखने में अँग्रेज़ों को आठ साल लगते हैं।स्पेनिश सीखने में स्पेनवासियों को दो-तीन साल। जापानी भाषा का व्याकरण तो इतना मुश्किल है कि लोग यूनिवर्सिटी में पहुँचने के बाद भी उसे सीखते रहते हैं। रूसी भाषा को विदेशी लोग बहुत मुश्किल मानते हैं। हालाँकि रूसियों के लिये भी वह आसान नहीं है। रूसी लोग सारी ज़िन्दगी भौंडी-भौंडी गलतियाँ करते रहते हैं। लेकिन रूसी भाषा दुनिया की 10 बड़ी भाषाओं में से एक मानी जाती है। रूस में और रूस के बाहर भी 25 करोड़ लोग रूसी भाषा में बातचीत करते हैं। रूस में रूसी भाषा ही राष्ट्रीय भाषा है। रूसी भाषा ही राजकीय भाषा है क्योंकि 80 प्रतिशत रूसी नागरिकों के लिये वह मातृभाषा भी है। लेकिन रूसी भाषा के अलावा रूस में करीब 162 अन्य भाषाओं का इस्तेमाल किया जाता है। रूस एक बहुजातीय देश है, जिसमें 150 जातियों के लोग रहते हैं। रूसी भाषा के अलावा वे अपनी मातृभाषा भी बोलते हैं। रूस में हर जाति की भाषा को सरकारी संरक्षण मिला हुआ है। हर उस प्रदेश में जहाँ किसी एक जाति के लोगों का बाहुल्य है, जैसे तातार, बशकीर, चुवाश, बुर्यात, चेचेन आदि जातियों के प्रदेशों में जातीय भाषा में ही शिक्षा दी जाती है तथा जातीय भाषा में ही अख़बार और पत्रिकाएँ प्रकाशित होती हैं। एकदम भारत जैसी स्थिति है, जहाँ अलग-अलग राज्यों में हिन्दी के साथ-साथ बंगला, तमिल, उड़िया, मलयाली, असमिया, तेलुगु, मणिपुरी, कन्नड़ आदि भाषाएँ इस्तेमाल की जाती हैं। रूस में किसी पर ज़बरदस्ती कोई भाषा लादी नहीं जाती। हर व्यक्ति ख़ुद अपनी भाषा का चुनाव करता है। रूस में भाषा का इस्तेमाल और चुनाव पूरी तरह से अन्तर्राष्ट्रीय नियमों और कानूनों के अनुकूल है।


इन्हें भी देखें

लिपियों की विचित्र बातें

6 comments:

Sanskrit Bhashi said...

भारतीय भाषाओं की जननी संस्कृत बोलचाल में लुप्त हो रही थी परन्तु कुछ दशकों से इसके बोलने बालों की तादाद बढतीजा रही है.

Sisir Sahoo said...

आपका ब्लॉग पढ़ा अछा लगा । परंतु आपने प्रारंम्भ मेँ एक गलती कर दिया है वह बताना चाहुगाँ । आपने काहा कुल 5000 भाषाएँ पृथ्वी पर वोले जाते है परंतु सटिक संख्या है 6909 !
आपनेँ संस्कृत के बारे मेँ नहीँ लिखा इस भाषा मेँ भी अपशब्द नहीँ है

Anonymous said...
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