26 March, 2013

हिन्दी विश्वविद्यालय के लिए हिन्दी-कम्प्यूटरी पाठ्यक्रम

हिन्दी में शिक्षण एवं विचार-विनिमय को बढ़ावा देने की विशेष पहल के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। मेरा विचार है कि इस विश्वविद्यालय में अन्य विषयों के साथ-साथ 'भारतीय भाषा कम्प्यूटरी' (Indic computing) का भी पाठ्यक्रम आरम्भ हो जिससे इसकी उपादेयता और भी बढ़ जाएगी। इसमें-

 *कम्प्यूटर एवं अन्य डिजिटल युक्तियों पर हिन्दी लिखना/पढ़ना,
*हिन्दी के विभिन्न कोश बनाना एवं उनका उपयोग करना,
*देवनागरी में लिखी सामग्री को पुराने फॉण्टों से यूनिकोड एवं यूनिकोड से देवनागरी में बदलना,
*देवनागरी से अन्य लिपियों में तथा अन्य लिपियों से भारतीय लिपियों में परिवर्तन करने वाले प्रोग्राम बनाना एवं उनका उपयोग करना
* भारतीय भाषाओं को आपस में अनुवाद करने वाले प्रोग्राम लिखना
* हिन्दी में वेबसाइट बनाना
* प्रसिद्ध मुक्तस्रोत प्रोग्रामों का स्थानीकरण (लोकलाइजेशन)
* हिन्दी के लिए टीटीएस, स्पीच-टू-टेक्स्ट, ओसीआर, आदि का परिचय और उपयोग
* हिन्दी विकिपीडिया में योगदान
* हिन्दी/देवनागरी के संसाधन के लिए उपयोगी औजारों से परिचय

आदि  की शिक्षा दी जाय।


इसके अतिरिक्त  विश्वविद्यालय अपना खुद का  हिन्दी कोश आरम्भ करे जो विकि से चले। अर्थात् इसमें कोई भी कुछ लिख सके। धीरे-धीरे यह उत्तम विश्वकोश बन जाएगा। पहले जो काम 'हिन्दी ग्रन्थ अकादमियों' से कराने का सोचा गया था उसे वर्तमान समय में सफलता पूर्वक पूरा करने का रास्ता विकि ही है। हमें अपने देशवासियों में आत्मविश्वास जगाना होगा और उन्हें लिखने के लिए प्रेरित करना होगा। यह काम बहुत आसानी से हो जाएगा।

15 March, 2013

अंग्रेजी में काम न होगा, फिर से देश गुलाम न होगा

मुझे इसमें कोई शक नहीं कि भारत का पूरा तंत्र 'भारतघातियों' के हाथ में चला गया है जो बड़ी चतुराई से देश को लगभग पुनः गुलामी के राह पर ढकेले जा रहे हैं। संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षाओं में अंग्रेजी का एकाधिकार और हिन्दी तथा अन्य भारतीय भाषाओं का पूर्णतः लोप करने की घोषणा इसका ताजा उदाहरण है। भाई, इन नौकरशाहों की जाँच इस बात के लिए होनी चाहिए की ये आम जनता से संवाद करने की कितनी योग्यता रखते हैं और इसके लिए इनको हिन्दी तथा भारतीय भाषाओं का अच्छा ज्ञान होना चाहिए। अंग्रेजी का केवल सामान्य ज्ञान भी इस काम के लिए पर्याप्त है। दूसरे स्वाभिमानी देशों (चीन, जर्मनी, फ्रांस, इजराइल, कोरिया, जापान, रूस आदि) का हमारे सामने उदाहरण है।

संसद में इस पर विरोध हुआ है। यह बहुत अच्छी बात है। देश की आम जनता और विशेषतः विद्यार्थी वर्ग को भी इसे किसी हाल में स्वीकार नहीं करना चाहिए और इसका जबरजस्त विरोध होना चाहिए।  इस देश में विदेशी नेता 'प्लांट' किए जा रहे हैं, इस देश में विदेशी भाषा की जड़ को सींचा जा रहा है और अपनी भाषाओं की जड़े काटी जा रही हैं, इस देश में विदेशियों के हित के नियम बनाए जा रहे हैं और इस देश में भ्रष्टाचार और काले धन को हटाने की नीतियां बनाने की मांग करने वालों का जीना हराम किया जा रहा है।

12 March, 2013

हिन्दी का 'विकि-हाऊ'

कुछ दिन हुए हिन्दी में भी विकि-हाऊ (wiki-how) शुरू हुआ है। विकिपिडिया और विकिट्रवेल की तरह यह भी एक विकि है जिसका अर्थ है कि कोई भी इसको सम्पादित कर सकता है।

किन्तु इसकी सबसे बड़ी विशेषता 'हाऊ' में छिपी है। हिन्दी में 'भारतकोश', 'हिन्दी विश्वकोश' और 'हिन्दी विकिपिडिया' आदि हिन्दी के सामान्य ज्ञानकोश पहले से ही उपलब्ध हैं। किन्तु विकि-हाऊ इनसे अलग है। इसमें केवल ऐसे लेख बनाए जाते हैं जो कुछ करने का चरणबद्ध तरीका बताते हैं कि अमुक काम कैसे करें। मेरे विचार से हिन्दी के लिए इस तरह के ज्ञान की सबसे अधिक आवश्यकता है। क्या, क्यों, कहाँ आदि के उत्तर तो हम कहीं से रट लेते हैं किन्तु किसी काम को कैसे किया जाय इसका वर्णन हिन्दी में बहुत कम मिलेगा। जबकि जरूरत सबसे अधिक है। सामान्य जनता को तो इससे लाभ होगा ही, हमारे इंजीनियरों तक को इससे लाभ मिलेगा।

हिन्दी और भारत का हित चाहने वाले सरल हिन्दी में इस तरह के हजारों लेख तैयार करें तो देश का कायाकल्प करने में मदद मिलेगी। देशवासियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, लोग स्वरोजगार की तरफ प्रवृत्त होंगे, सृजनशीलता बढ़ेगी, देश की आर्थिक प्रगति सुदृढ होगी।

हिन्दी विकिहाऊ का मुखपृष्ट