26 March, 2011

हिन्दी के विकास के लिये आवश्यक छोटी-छोटी बातें

1) पुराने फाण्टों को छोड़ें, यूनिकोड में काम करें।

२) आपके पास कोई सामग्री (लेख, शब्दावली, शब्दकोश, सूक्ति-संग्रह, पुस्तक आदि) है तो उसे अपने कम्प्यूटर से उठाकर अन्तरजाल (विकिपीडिया, विकिकोश, विकिबुक्स, विकिकोट, गूगल डॉक्स आदि) पर रखें। गूगल डोक्स पर सबको शेयर करें।

३) अपने ब्लॉग पर कुछ अच्छी सामग्री या विचार लिखें हैं तो दूसरों को इसे नकल करने की पूरी छूट दें। साफ शब्दों में घोषणा करें कि आपकी सामग्री कोई नकल करे तो आपको खुशी होगी। ध्यान रखिये कि लोगों ने नेट पर ऐसी-ऐसी सामग्री निःशुल्क उपलब्ध करा रखी है जिसका बाजार मूल्य बहुत अधिक है।

४) हिन्दी की अच्छी साइटों को बुकमार्क करके रखें। दूसरों को इनके बारे में बताएं।

५) भाषाई औजारों का बहुत महत्व है। इन्हें जाने, इन्हें खोजें, इनका अधिकाधिक उपयोग करें, इनके न होने पर लोगों से बनाने का आग्रह करें।

६) कम से कम दो व्यक्तियों को कम्प्यूटर पर हिन्दी में काम करना सिखाएँ। एक बार वे आरम्भिक चीजें सीख जाएंगे, आगे की चीजें स्वयं सीखते जाएंगे।

७) यदि आप किसी भाषा में प्रोग्रामिंग जानते हैं तो हिन्दी का कोई टूल विकसित करने या किसी मौजूद टूल को उन्नत बनाने की चुनौती अपने हाथ में लीजिये। आपका भाषा ज्ञान बढ़ेगा ; आपकी प्रोग्रामिंग क्षमता बढ़ेगी और हिन्दी भाषा एवं हिन्दीभाषियों की उन्नति सुनिश्चित होगी।

८) हिंदी के सार्वजनिक कार्यों में हाथ बटाइये । हिन्दी विकिपिडिया, हिन्दी विक्शनरी, प्रमुख मुक्तस्रोत सॉफ्टवेयरों का हिन्दीकरण, हिन्दी की तरह-तरह की शब्दावलियों और शब्दकोशों का विकास करना व उन्हें नेट पर चढाना, हिन्दी में विविध विषयों पर लेख, ब्लॉग आदि लिखना, हिन्दी के भाषायी टूल विकसित करना, आदि कुछ प्रमुख सार्वजनिक कार्य हैं।

32 comments:

JALES MEERUT said...

हिंदी विकास के लिए आपके सभी सुझाव महत्वपूर्ण हैं | उनका अनुसरण किया जाएगा |
अमरनाथ 'मधुर '

सुज्ञ said...

सार्थक प्रेरक सुझाव है। ापके हिंदी समर्पण को अभिनंदन

निशांत मिश्र - Nishant Mishra said...

प्रिय अनुनाद, मैं इन सभी विचारों का भरपूर समर्थन करता हूँ और मैंने यथासंभव प्रयास किये हैं कि अपने द्वारा किये गए कार्यों को अंतरजाल पर सर्वसुलभ कराऊँ.
हिंदी में फौन्ट्स की मारामारी से मैं भी परेशान हूँ. मेरे कार्यालय में कोई भी यूनीकोड/इनस्क्रिप्ट में काम नहीं करना चाहता और दस बहाने बनाते हैं. अभी भी बहुत सारे डेवेलपर्स पुराने फौन्ट्स पर आधारित टूल बना रहे हैं जबकि उन्हें इससे बाहर आकर प्रयोग करने चाहिए. यदि मुझे प्रोग्रामिंग आती तो मैं यूनीकोड में ही कुछ नया करने का प्रयास करता.

प्रवीण पाण्डेय said...

सारी बातें ध्यान रखने योग्य।

दर्शन लाल बवेजा said...

आपके सभी सुझाव महत्वपूर्ण हैं | उनका अनुसरण किया जाएगा |

ललित शर्मा said...

ध्यान रखने एवं अमल करने योग्य

आभार

डॉ० डंडा लखनवी said...

आपके सुझाव सराहनीय हैं। फांटों की अनेक समस्याओं का बेहतर समाधान युनिकोड है। यदि युनिकोड फांट का अधिकाधिक प्रयोग होने लगेगा तो कई समस्याओं से मुक्ति मिल जायगी। युनिकोड में अभी सजावटी फांट और फांट साइज के विकल्प कम हैं। इन्हें बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी

mukti said...

आपकी बात से पूरी तरह सहमत हूँ. जे.एन.यू. के हमारे सेंटर [संस्कृत सेंटर] ने इस पर काफी काम किया है. मुझे अभी पूरी जानकारी नहीं है, मिलते ही बाटूँगी.

Learn By Watch said...

मैं तो हिन्दी में कार्य के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूँ, मेरे कार्य को आप मेरे यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं

विनोद पाराशर said...

अनुनाद जी,
हिंदी के विकास के लिए आपने जो महत्वपूर्ण सुझाव दिये हॆं,अनुकर्णीय हॆं.मॆं स्वयं भी व अपने अन्य मित्रों से भी अनुरोध करूंगा कि वे यदि वास्तव में हिंदी का विकास करना चाहते हॆं,तो इसपर अमल करें.

Suresh Chiplunkar said...

पूरी तरह से सहमत…

सुलभ said...


जी, बिलकुल, मेरी तरफ से भी प्रयास जारी है.

http://sulabhjaiswal.wordpress.com/2011/03/27/entrepreneurship-development-india/

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'/ Dr. Purushottam Meena 'Nirankush' said...

"हम में से बिरले ही जानते हैं कि सफल और परिणामदायी प्रार्थना कैसे की जाती है? "
आपको जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि केवल ‘‘एक वैज्ञानिक प्रार्थना हमारा जीवन बदल देगी|’’ सही, उद्देश्यपूर्ण, सकारात्मक ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’ का नाम ही-"कारगर प्रार्थना" है!
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हम में अधिकतर लोग तब प्रार्थना करते हैं, जबकि हम किसी भयानक मुसीबत या समस्या में फंस जाते हैं| या जब हम या हमारा कोई किसी भयंकर बीमारी या मुसीबत या दुर्घटना से जूझ रहा होता है, तो हमारे अन्तर्मन से स्वत: ही प्रार्थना निकलती हैं| क्या इसका मतलब यह है कि हमें प्रार्थना करने के लिये किसी मुसीबत या अनहोनी के घटित होने का इन्तजार करना चाहिए! हमें सामान्य दिनों में भी, बल्कि प्रतिदिन ही प्रार्थना करनी चाहिये, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह है कि "हम में से बिरले ही जानते हैं कि सफल और परिणामदायी प्रार्थना कैसे की जाती है? " यही कारण है कि अनेकों बार मुसीबत के समय में हमारे ह्रदय से निकलने वाली, हमारी सामूहिक प्रार्थनाएँ भी सफल नहीं होती है! ऐसे में हम निराश और हताश हो जाते हैं और प्रार्थना की शक्ति के प्रति हमारी आस्था धीरे-धीरे कम या समाप्त होती जाते है! हमारा विश्वास डगमगाने लगता है, जबकि इस असफलता के लिए हमारी मानसिक अज्ञानता अधिक जिम्मेदार होती है!

क्योंकि हम में से बहुत कम लोग जानते हैं कि हम दुख, क्लेश, तनाव, ईर्ष्या, दम्भ, अशान्ति, भटकन, असफलता और अनेकों ऐसे डरों से भरे अपने जीवन को सही दिशा में मोड़कर जीवन के असली मकसद और अपनी सकारात्मक मंजिल को आसानी से कैसे प्राप्त कर सकते हैं| आपको जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि केवल ‘‘एक वैज्ञानिक प्रार्थना हमारा जीवन बदल देगी|’’ सही, उद्देश्यपूर्ण, सकारात्मक ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’ का नाम ही-"कारगर प्रार्थना" है! जिसका किसी धर्म या सम्प्रदाय से न तो कोई सम्बन्ध नहीं है और न ही किसी धर्म में इसका विरोध है| यह ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’ तो हर एक मानव के जीवन की भलाई और समाज तथा राष्ट्र के उत्थान के लिये बहुत जरूरी है| मैं समझता हूँ कि "किसी भी धर्म में इसकी मनाही नहीं है|" लेकिन आपका जीवन आपका अपना है! निर्णय आपको करना होगा कि आप इसे कैसे व्यतीत करना चाहते हैं? आप अपने जीवन को पल प्रतिपल घुट-घुट कर और आंसू बहाकर रोते हुए काटना चाहते हैं या अपने जीवन में प्रकृति के हर एक सौन्दर्य, खुशी और अच्छाईयों को बिखेरना चाहते हैं?

इस संसार में केवल और केवल आप ही अकेले वो व्यक्ति हैं, जो इस बात का निर्णय लेने में समर्थ हैं कि आप अपने अमूल्य और आलौकिक जीवन को बर्बाद होते हुए देखना चाहते हैं या आप अपने जीने की वर्तमान जीवन पद्धति, अपनी सोचने की रीति, खानपान की रीति और अपने तथा दूसरों के प्रति आपकी सोचने, समझने और चिन्तन करने की धारा को सही दिशा में परिवर्तित करके और बदलकर वास्तविक तथा सही अर्थों में अपने जीवन को सम्पूर्णता से जीना चाहते हैं या नहीं?

सेवासुत डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
मार्गदर्शक : ‘‘वैज्ञानिक प्रार्थना’’
Ph. No. 0141-2222225 (Between 07 to 08 PM)
(If I am Available in JAIPUR, Rajasthan)
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http://youmayaskme.blogspot.com/
dr.purushottammeena@yahoo.in
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DesiGujju said...

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शिक्षामित्र said...

सही कह रहे हैं। पहल शुरू भी हुई है। मगर कई लोग यूनिकोड में सीधा काम करने की बजाए अब भी ऐसे सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रहे हैं जो रेमिंग्टन की-बोर्ड ले-आउट पर आधारित है।

शिक्षामित्र said...

वर्णक्रम से परिचित न होने के कारण लोगों को दिक्कत हो रही है मगर जल्दी ही लोगों के लिए इसे सीखना एक बाध्यता होगी।

जवाहर चौधरी said...

आपका ब्लाग बहुत उपयोगी है . यदि इसका प्रसार सुगम बनाना चाहते हैं तो वर्ड वेरिफिकेशन हटायें . बहुत आसन है , निसंदेह आप जानते होंगे .
मैंने अपने ब्लाग पर इसे डाल लिया है , उम्मीद है सेही इसका लाभ ले सकेंगे .
पुनः आभार एवं धन्यवाद .

प्रवीण कुमार दुबे said...

आपका विचार सराहनीय है|
बहुत बधाई आपको

डॉ० डंडा लखनवी said...
This comment has been removed by the author.
नरेश सिह राठौड़ said...

जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं |माफ कीजियेगा आपकी मेल आई डी ना होने की वजह से टिप्पणी के द्वारा शुभकामनाये भेजी है |

Sam said...

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apko apne blog par add deni chahie jisse aap kuch laxmi grahan kar sake jisse apka bhi vikas ho or apke vicharo ka bhi

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चंदन कुमार मिश्र said...

ध्यान देने योग्य! अवश्य देंगे।

स्वाति said...

आपके सभी सुझाव सार्थक और प्रेरक है।
कृपया यह बताए कि श्रीकृष्ण सरल जी से संबन्धित गद्य साहित्य इंटरनेट पर कहा मिल सकेगा...

स्वाति said...

जानकारी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद सर .... इन स्थलो को मैं पहले भी देख चुकी हु , अधिकांश स्थानो पर श्रीकृष्ण सरल जी की पद्य रचनाए है ...उनकी गद्य रचनाओ को ढूंढने मे दिक्कत हो रही है ॥विकिपेडिया मे उनकी गद्य रचनाओ को प्रकाशित करने का कार्य भी बहुत दिनो से लंबित है ....

ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत महत्वपूर्ण सुझाव | हमेशा याद रखूँगा |

कृपया मेरी भी रचना देखें और ब्लॉग अच्छा लगे तो फोलो करें |
सुनो ऐ सरकार !!

vijay upadhyay said...

अनुनाद जी नमस्कार मै लंबे अर्से से आपसे प्रेरित होकर यूनिकोड का इस्तेमाल कर रहा हूं मुझे फोरसी गांधी का कनवर्टर चाहिए, जो कि हिंदी फांट परिवर्तक में उपलब्ध नही है,

Lucas said...

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MAAC said...

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