15 June, 2010

इग्नू ज्ञान बांटने के लिये बना है या छिपाने के लिये?

इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) भारत में दूरशिक्षा के माध्यम से शिक्षा का प्रसार करने के लिये बनी है। इन्होने इ-ज्ञानकोश नामक कार्यक्रम आरम्भ किया है जिसमें कुछ शैक्षिक सामग्री तैयार करके अन्तरजाल पर रखा गया है। इसमें कुछ हिन्दी सामग्री भी है।

किन्तु समस्या यह है कि बिना रजिस्ट्रेशन किये इस सामग्री का अवलोकन (पठन) नहीं किया जा सकता। रजिस्ट्रेशन भी ऐसा कि जिसमें पचासों प्रश्न पूछे जाते हैं। रजिस्ट्रेशन करने के बाद भी आपके पास पासवर्ड नहीं भेजते (मुझे रजिस्टर किये हुए एक सप्ताह हो गया है, अभी तक कुछ नहीं आया)।

आज के युग में जबकि एमआईटी जैसे विश्वप्रसिद्ध संस्थान अपना सारा व्याख्यान मुक्तकोर्स (ओपेनकोर्स) करके सर्वसुलभ कर दिये हैं; विश्व में चहुँओर ओपेनकोर्स की गूँज है; ऐसे में इग्नू का अपना पाठ्यसामग्री 'छिपाकर' रखना कहाँ तक उचित है? इनको विकिपिडिया, ओपेनकोर्स, ओपेनसोर्स, ओपेनडिजाइन, ओपेनकोड आदि के बारे में पता तो होगा!

6 comments:

माधव said...

i dont know

नरेश सिह राठौड़ said...

ऊँची दूकान फीका पकवान |

Maria Mcclain said...

interesting blog, i will visit ur blog very often, hope u go for this website to increase visitor.Happy Blogging!!!

Rahul said...

they just cant keep up with time!!!

सुज्ञ said...

यहां एक विस्तृत टिप्पणी की दरकार है।
http://shrut-sugya.blogspot.com/2010/06/blog-post_29.html

शिक्षामित्र said...

इग्नू के साथ बहुत सारी समस्याएं शुरु से रही है जिनके समाधान पर ध्यान देने की बजाए वह अपनी शाखाओं के विस्तार में लगा है।