24 September, 2009

हिन्दी के लिये उपयोगी फायरफॉक्स एक्सटेंशन

अगर आप किसी कारण से अपने कम्प्यूटर पर कोई इण्डिक आई एम ई नहीं इन्स्टाल करना चाहते तो फायरफाक्स के निम्नलिखित में से कोई एक या अधिक ऐड-ऑन (अथवा एक्स्टेंशन या बुकमार्कलेट) का प्रयोग कर सकते हैं। इससे आपको एमएस वर्ड, नोटपैड आदि प्रोग्रामों में लिखने में कोई मदद नहीं मिलेगी। केवल ब्राउजर में खुलने वाले टेक्स्ट बाक्सों में आप कहीं भी हिन्दी लिख सकते हैं। इसमें भी 'ट्रांसलिटरेटर' आदि ऐसे हैं जो इंटरनेट से बिना जुड़े भी काम करते हैं। कुछ अन्य केवल इण्टरनेट से जुड़े होने पर ही काम करेंगे।

12 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

काम की जानकारी! आभार!

डॉ .अनुराग said...

शुक्रिया अनुनाद जी

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

ट्रान्सलिेटरेटर टूल मैने इन्स्टाल कर लिया और यह टिप्पणी उसी के माध्यम से है|
बरहा की तरह यह कम्प्यूटर पर इन्स्टॉल करने योग्य हो तो बेहतर रहे|
आप प्रिय हैं अनुनाद जी, सिवाय इसके कि आपको मेरी भाषा में शब्दों की कमी पसन्द नहीं! :-)

अनूप शुक्ल said...

शुक्रियाजी, आप वो वाला श्लोक लगाइये जी अब नीचे !

Rakesh Singh - राकेश सिंह said...

उपयोगी जानकारी |

धन्यवाद !

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत काम की जानकारी दी है आपने तहे दिल से शुक्रिया ..

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

अदभुत और उपयोगी जानकारी है. आप अकसर चमत्कृत कर देने वाली सूचनाएं ही देते हैं. बधाई और

प्रवीण त्रिवेदी PRAVEEN TRIVEDI said...

wamt to communicate through e-mail.
please reply soon !!

(regarding a problem about two pages for fatehpur district .)
1-http://en.wikipedia.org/wiki/Fatehpur,_Fatehpur
2-http://en.wikipedia.org/wiki/Fatehpur_district

please suggest the solution.
my e-mail is praveentrivedi009ATGMAILDOTCOM

Atmanand said...

आपकी प्रतिक्रिया और उत्साहवर्धन हेतु शुक्रिया । शायद , आपको भी इस विषय से परहेज है ! सेक्स और समाज जैसे मुद्दे पर सामग्रि विश्वकोश के लिये जरुरी है ऐसा मैं मानता हूं । क्या आप सेक्स को सामाजिक मुद्दा नहि मानते है? और मैने जो लिखा है उस में कोइ मस्तराम की कहानी नही लिखि है !
और दुसरी बात कि आपने शायद देखा नही वहां मेरे दो और आलेख है अन्य विषयों पर । और आगे और भी लिखना है अभि तो शुरुआत है ।

Krishna Kumar Mishra said...

श्रीमन लाइनक्स में यूनीकोड व्यवस्था के विषय में अवश्य बताये, क्या लाइनक्स पर हिन्दी ब्लागिंग संभव है आफ़लाइन

Devesh said...

अनुनाद भाई... आप मेरे ब्लाग पर आए बहुत शुक्रिया। जिस इंदौरी लहजे में आपने सीधी बात कही वह दिल को छू गई। आज आपके ब्लाग को देख पाया, दिल खुश हो गया। शुक्राचार्य वाला श्लोक बहुत लाजवाब है। आप जो कर रहे हैं वह स्वस्थ्य भारत के लिहाज से बड़ा काम है। चूंकि आप हिंदी में भी लिखते हैं तो जाहिर है इसकी महिमा भी जानते हैं, लेकिन आपको एक दुखद तथ्य से अवगत कराए बगैर नहीं रह पा रहा हूं कि गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर गुजरात हाईकोर्ट का राष्ट्रभाषा के संदर्भ में एक जनहित याचिका पर जो फैसला आया, उसमें नियमों और कानूनों से बंधी कोर्ट की बेबसी तड़पा देने वाली है। डिब्बाबंद सामग्री पर हिंदी में निर्देश न छपवा पाने के फैसले का आधार बना हिंदी का राष्ट्रभाषा न होना... कोर्ट ने कहा हिंदी को राजभाषा का दर्जा तो दिया गया है, लेकिन क्या इसे राष्ट्रभाषा घोषित करने वाला कोई नोटिफिकेशन मौजूद है? गणतंत्र दिवस की पूर्वसंध्या पर यह कालिमा आपको सप्रेम ताकि आप इस स्याही बना कर अपने जानने-पढऩे समझने वालों को जागरुक करने में एक और मजबूत कदम उठाएं। हिंदी की अलख के लिए शुभकामनाएं।

नरेश सिह राठौड़ said...

इस सामग्री को ज्यादा से ज्यादा लोगो के सामने लाया जाए यही इसका सच्चा मूल्य होगा | आभार