24 September, 2009

कम्प्यूटर को हिन्दी-सक्षम बनाने हेतु उपलब्ध आई एम ई

इण्डिक आई एम ई वे साफटवेयर हैं जिनको एक बार किसी भी कम्प्यूटर पर इंस्टाल कर देने से वह कम्प्यूटर हमेशा के लिये हिन्दी (एवं अन्य भारतीय भाषाएँ) लिखने में सक्षम हो जायेगा। आप चाहें इन्टरनेट से जुड़े हैं या नही, हिन्दी लिखने में कोई असुविधा नहीं होगी। एम एस वर्ड हो या नोटपैड, ओपेनआफिस हो या गूगल चैट, किसी के ब्लाग पर टिप्पणी लिखनी हो या किसी के मेल का जवाब देना हो - सब जगह काम करेगा।

नीचे कुछ आई एम ई का लिंक दिया गया है। समयाभाव और मुझे पर्याप्त जानकारी एवं अनुभव न होने के कारण इनके बारे में विस्तार से नहीं लिख सकता। किन्तु इतना अवश्य जान लें कि ये आई एम ई भी अलग-अलग तरह के हैं। उनकी अपनी विशेषताएं हैं। उदाहरण के लिये किसी में बहुत तरह के कुंजी-पटल (इंस्क्रिप्ट, रैमिंगटन, फोनेटिक आदि) उपलब्ध हैं तो किसी में नहीं। किसी को इन्स्टाल करने के लिये विन्डोज एक्स-पी की सीडी चाहिये तो किसी के लिये यह आवश्यक नहीं है।
कुछ जानकारी इन लिंकों पर मिल जायेगी -

बारहा, हिन्दीराइटर तथा इंडिक IME की तुलनात्मक समीक्षा

'हिन्दी टूलकिट' आई एम ई को इंस्टाल करें व अपने कम्प्यूटर को हिन्दी-सक्षम बनावें

टूलकिट कार्यप्रणाली एवं महत्व

हिंदी लिखने और पढने के लिए निर्देश

कैफ़े हिन्दी टाइपिंग औजार - मेरी प्रतिक्रिया


उपलब्ध इण्डिक आई एम

11 comments:

Mohammed Umar Kairanvi said...

इण्डिक लाजवाब होता है, दुसरे तो अरबी शब्‍द क़ुरआन और हमार नाम कैरानवी तक नहीं लिख पाते, बहुत उपयोगी जानकारी, बधाई
भैया वहां चिपलूकर की पोस्‍ट पर पधारो तुम्‍हार घर बुलावा दे चुका,

पहला इस्‍लामी रैंक 2 ब्‍लाग कोई देखना चाहे तो,
http://islaminhindi.blogspot.com/

अनुनाद सिंह said...

कैरानवी भिया,

'कुरान के कोई कोई पाँच सुक्तियाँ' कहाँ हैं। आप अपना वादा भूल गये क्या?

हिमांशु । Himanshu said...

बरहा का उपयोग करता हूँ मैं । बेहद उपयोगी है ।
जानकारी का आभार ।

Mohammed Umar Kairanvi said...

मेरा कहा भूल गये मैंने कहा था इज्‍जत से पोस्‍ट बनाके डालो, सर्वधर्म को चैलेंज करेंगे अपने धर्म के गुरूओं को भी कहूंगा वह जवाब दें, वह तुम्‍हें मुतमइन ना कर सकेंगे, क्‍यूंकि तुम्‍हें तो केवल चाणक्‍य प्रतिपादित ही संभाल सकता है, जब वह नहीं दे सकेंगे तो में दूंगा तो मैं अपने धर्म में महान विचारक बन जाउंगा,यह सब इसलिये कि कह रहा हूं कि मुझे 6666 आयतों में से एक ही ऐसी आयत मिल गयी जिसमें 40 गुण निकल आयेंगे, एक दूसरा कारण यह भी है कि तुम्‍हें अभी यही सिखा रहा हूं कि कुरआन शब्‍द अरबी भाषा का है, जब थोडा ज्ञान तुम्‍हारा बढ जायेगा, यानी तुम अभी प्राइमरी में हो कुरआन की शिक्षा ग्रहन करने के काबिल तुम्‍हें में बनाउंगा,
चाणक्‍य को तो मैंने पढ लिया आपने ही ध्‍यान दिलाया था, धन्‍यवाद
मनु स्‍म़ति का अध्‍ययन कर रहा हूं मजा आगाया, महिला और दलित तो खुश हो जायेंगे जब मैं मनु स्‍म़ति ज्ञान प्रस्‍तुत करूंगा

signature:
विचार करें कि मुहम्मद सल्ल. कल्कि व अंतिम अवतार और बैद्ध मैत्रे, अंतिम ऋषि (इसाई) यहूदीयों के भी आखरी संदेष्‍टा? हैं या यह big Game against Islam है?
antimawtar.blogspot.com (Rank-1 Blog)

छ अल्लाह के चैलेंज सहित अनेक इस्‍लामिक पुस्‍तकें
islaminhindi.blogspot.com (Rank-2 Blog)
डायरेक्‍ट लिंक

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

केवल की मात्रा के लिये मुझे इण्डिक आईएमई बेहतर लगता है - उसमें ~o की बजाय O से काम चल जाता है।

Raviratlami said...

संजीव तिवारी ने हिन्दी टूलकिट नामक आईएमई सेटअप करने की बढ़िया विस्तृत जानकारी यहाँ दी है -

http://aarambha.blogspot.com/2009/09/blog-post_17.html

अनुनाद सिंह said...

धन्यवाद, रवि भाई! आप द्वारा बतायी गयी कड़ी भी सम्मिलित कर रहा हूँ।

अर्शिया said...

जानकारी के लिए आभार।
( Treasurer-S. T. )

paddy said...

प्रदीप कुमार चौधरी यू कैन दो आईटी

paddy said...

प्रदीप कुमार चौधरी यू कैन दो आईटी

naval_kishore said...

अंधविश्‍वास और मुफ्तखोरी सिखाने वाला धर्म किस काम का ? -- प्रयागदत्त पंत
धर्म के 10 लक्षण- मानधर्म (गीता प्रेस)
http://navelkishore.blogspot.com/2011/09/10.html
मनु महाराज धर्म लक्षणों में प्रेम और कर्तव्‍यपरायणता जैसे उच्‍च्‍ा आदर्शों को कोई स्‍थान नहीं, नैतिकता के आधार स्‍तंभ दो हैं- सत्‍य और प्रेम, कर्तव्‍यपरायणता रूपी भवन इन पर खडा होता है, बिना प्रेम संबधों की स्‍थापना और बिना कर्तव्‍यपालन की भावना के कोई समाज टिक नहीं सकता