20 February, 2009

यूनेस्को का भाषाओं पर खतरे का मानचित्र

२१ फरवरी को अन्तरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस है। इसी दिन एक वर्ष से मनाया जा रहा अन्तरराष्ट्रीय भाषा-वर्ष समाप्त हो रहा है। इस अवसर पर यूनेस्को ने एक महान कार्य किया है। उन्होने विभिन्न स्तर के खतरों का सामना कर रही विश्व की भाषाओं का मानचित्र प्रकाशित किया है।

इस अवसर पर विभिन्न भाषाविदों की राय है कि अन्तरजाल एवं मोबाइल तकनीक के द्वारा अल्पसंख्यक भाषा-भाषियों को जोड़ने मे सहायता मिली है। इससे उनका अकेलापन (आइसोलेशन) का सिलसिला टूटा है जिससे भाषाओं के संरक्षण को बल मिला है ।

अंग्रेजी के अंधाधुंध उपयोग और गुलाम मानसिकता के चलते हिन्दी सहित सभी भारतीय भाषाओं पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। सभी भाषा-प्रेमियों के सामने इसका सम्यक और प्रभावी हल निकालने की चुनौती है !

6 comments:

परमजीत बाली said...

अनुनाद जी,अच्छी जानकारी व विचारणीय पोस्ट लिखी है।आभार।

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

इसके लिए सशक्त और प्रभावी जनान्दोलन ज़रूरी है.

P.N. Subramanian said...

छत्तीसगढ़ प्रांत में उन्होंने छत्तीसगढ़ी को प्रशासनिक भाषा बनाया है. ऐसा ही दूस प्रान्त भी करते हैं तो समस्या का समाधान हो सकता है. आभार.

धीरेन्द्र सिंह said...

सामयिक जानकारी है। हिंदी के प्रति आपकी प्रतिबद्धता प्रसंशनीय है।

Shastri said...

इस तालिका में उन्होंने हिन्दुस्तान की काफी सारी भाषाये जोडी हैं. अफसोस की बात है कि विदेशी लोगों यह कह रहे हैं लेकिन हम लोगो जो कुछ भी कर सकते हैं वह अभी कर नहीं रहे है.

आईये कम से कम कुछ चिट्ठाकार इन भाषाओं को हिन्दी लिपि प्रदान करके, चिट्ठाकारी के द्वारा इन भाषाओं को जीवित रखें.

सस्नेह -- शास्त्री

Ashok Pande said...

The proper translation for ISOLATION is not अकेलापन. विलगाव is the correct word.