16 February, 2009

चिट्ठा मिलनों की विषय-वस्तु क्या हो?

खुशी की बात है की हिन्दी के उत्साही युवक-युवतियां देश के विभिन्न भागों में ब्लाग-मिलनों का आयोजन कर रहे हैं। इनकी उपयोगिगिता में किसी को कोई संदेह नहीं है किंतु यदि इनकी विषय-वस्तु को आपस में विचार करके तैयार किया जाय तो इनकी उपयोगिता और बढ़ जायेगी।

मेरे विचार से चिट्ठा मेलों की विषय-वस्तु में इन बिन्दुओं का समावेश होना चाहिए -

) यह बताया जाय कि अब कम्प्यूटरों पर हिन्दी लिखना-पढ़ना बायें हाथ का खेल हो गया है। लोगों को हिन्दी लिखने के कुछेक प्रमुख तरीकों का प्रदर्शन करके उनके विश्वास को पुख्ता किया जाय।

) हिन्दी चिट्ठाकारी के बारे में बात हो। उसकी स्थिति के बारे में बात हो। चिट्ठाकारी का भी प्रदर्शन करके बताया जाय।

) हिन्दी के प्रमुख आफलाइन टूल्स और ऑनलाइन टूल्स के बारे में बताया जाय।

) हिन्दी के प्रमुख साइटों - जैसे नारद, ब्लागवाणी आदि एग्रीगेटर, हिन्दी विकिपिडिया, कविता कोश, हिन्द-युग्म, हिन्दी की पत्र-पत्रिकाएँ आदि के बारे में एवं उनके पते बताएं जाँय।

) हिन्दी विकिपीडिया पर लिखने के लिये अनुरोध किया जाय।

) हिन्दी के चर्चा-समूहों पर चर्चा करने की सलाह दी जाय। उनके पते बताए जांय।

) यह बताया जाय कि हिन्दी में वेब-
खोज संभव है, आसान है, और बहुत उपयोगी है।

) यह बताया जाय कि अब ऐसे उपकरण उपलब्ध हैं जिनकी सहायता से एक लिपि को दूसरी लिपि में बदला जासकता है; एक फांट को दूसरे में बदला जा सकता है।

) गूगल ट्रांसलेट के बारे में बताया जाय यह बताया जाय कि यद्यपि मशीनी अनुवाद पूरी तरह से ठीक नहीं होता, फ़िर भी इतना शुद्ध होता है कि काफी हद तक अर्थ एवं आशय समझ में जाते हैं . इसलिए यह बहुत उपयोगी है और भविष्य में इससे भी अधिक उम्मीद है।

१०) हिन्दी में स्थानीकृत (लोकलाइज्ड) सोफ्टवेयरों के बारे में बताया जाया। संभव हो तो हिन्दी इंटरफेस वाले कुछ अनुप्रयोग दिखाए जांय

११) प्रमुख मुक्त-स्रोत सोफ्टवेयरों के बारे में बताया जाय।


१२) अंत में दस-पन्द्रह रूपये लेकर सबको एक सी-डी दी जाय जिसमे हिन्दी की उपयोगी सामग्री और सॉफ्टवेर हों। इसमें हिन्दी के ऑफलाइन संपादक , हिन्दी के शब्दकोश,
हिन्दी विकिपीडिया , हिन्दी के प्रमुख जालस्थलों की सूची और पते, हिन्दी इंटरफेस वाले मुफ्त सोफ्टवेयर, हिन्दी के बारे में क्या-क्यों और कैसे आदि रखी जा सकती है।

अभी तो इतना ही याद रहा है। और भाई लोग और उपयोगी बातें सुझाएँ।

22 comments:

संगीता पुरी said...

बहुत सही कहा आपने ... सिर्फ ब्‍लागर मीट का कोई अर्थ नहीं ... यदि हम कुछ लक्ष्‍य लेकर न चलें ।

रंजन said...

वाकई इनकी बहुत जरुरत है..

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

यह भी बताया जा सकता है कि:
१. कुछ भी लिखने के बजाय सही, उपयोगी और विश्वसनीय लिखा जाय
२.कोपीराइट आदि से सम्बंधित कानूनों का सम्मान करके धडाधड फिल्मी गीत आदि अपलोड करने से बचा जाय
३. बुद्धिहीन कॉपी-पेस्ट से आगे बढ़कर कुछ अपना, कुछ नया लिखने का प्रयास हो.

Shastri said...

अनुनाद जी, आप ने काफी सारी ऐसी बातें याद दिला दीं जिनको हर चिट्ठाकार आसानी से कर सकता है, लेकिन जो कभी मन में नहीं आए.

इन सुझावों के लिये आभार !!

सस्नेह -- शास्त्री

Hari Joshi said...

आपने सटीक लिखा है। यह विकास के लिए जरूरी है कि हिन्दी में स्थानीय सोफ्टवेयरों के बारे में जानकारी सहजता से सुलभ होनी चाहिए और प्रमुख मुक्त-स्रोत सोफ्टवेयरों के बारे में भी। आपकी साइट पर उपयोगी यूनीकोड कनवर्टर होने की सूचना जब मेरे मित्र अनिल ने दी तो मेरी समस्‍या हल हो गई। कई बार उसका उपयोग कर चुका हूं मैं। इस तरह की जानकारियां चिट्ठा मेलों में हो तो बहुत अच्‍छा होगा।

डॉ .अनुराग said...

शायद ओर शायद यही बात प्राथमिकता में होनी चाहिये .....क्यूंकि यही हिन्दी चिट्ठो को प्रसार दे सकती है .

समयचक्र said...

बहुत सही कहा है...

ज्ञानदत्त । GD Pandey said...

सही कहना है आपका। एक आदमी दस को कम्प्यूटर पर हिन्दी परिचय कराये तो बड़ा फर्क पड़ेगा।

Udan Tashtari said...

अन्तर्जाल पर हिन्दी और हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रसार के लिए अति उपयोगी सुझाव, आभार.

अफ़लातून said...

अनुनादजी के इन सुझावों से पूर्ण सहमति ।क्रियान्वयन में दिक्कत हो तो 'प्रतिभास' की शुरुआती प्रविष्टियों से मदद मिल जाएगी ।

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बहुत ही उपयोगी सुझाव दिए आपने......आभार

Anonymous said...

बहुत बढ़िया पोस्ट. आपका कहना सही है.

हमें तो इस बात की खुशी है कि हिन्दी के प्रचार-प्रसार की लगन ऐसी है कि अफलातून जी भी आपसे सहमत हैं. धन्य है हिन्दी.

गिरीश बिल्लोरे "मुकुल" said...

सब उद्ध्येश्य पूर्ण ही मिलना चाहतें है
पर कैंकड़-वृत्ति भी तो कोई चीज है ..!
बधाई सार्थक आलेख हेतु

seema gupta said...

बहुत ही उपयोगी सुझाव दिए आपने...

Regards

संजीव कुमार सिन्हा said...

आपके विचार अत्‍यंत प्रासंगिक हैं।

RAJIV MAHESHWARI said...

बहुत सही कहा आपने ...

काजल कुमार Kajal Kumar said...

अच्छे सुझाव हैं भाई.

उन्मुक्त said...

अच्छे विचार हैं।

Harkirat Haqeer said...

अंत में दस-पन्द्रह रूपये लेकर सबको एक सी-डी दी जाय जिसमे हिन्दी की उपयोगी सामग्री और सॉफ्टवेर हों। इसमें हिन्दी के ऑफलाइन संपादक , हिन्दी के शब्दकोश, हिन्दी विकिपीडिया , हिन्दी के प्रमुख जालस्थलों की सूची और पते, हिन्दी इंटरफेस वाले मुफ्त सोफ्टवेयर, हिन्दी के बारे में क्या-क्यों और कैसे आदि रखी जा सकती है।

Aapki ye bat bhot acchi lagi...!!

Debashish said...

Sahi salaah!

Manoshi said...

सहमत हूँ। स्मार्ट इंडियन (अनुराग जी) के टिप्पणी से भी।

बालसुब्रमण्यम said...

बहुत ही विचारपूर्ण बातें कहीं हैं आपने। यदि इन पर अमल किया जाए, तो हिंदी चिट्ठाकारी काफी तरक्की करेगी।

मेरी ओर से दो-एक सुझाव और भी:-

1. अभी विज्ञापन के माध्यम से चिट्ठों से पैसे कमाना हिंदी में संभव नहीं है, क्योंकि एडसेन्स अभी हिंदी में उपलब्ध नहीं है। पर चिट्ठों के इस आर्थिक पहलू पर भी नए चिट्ठेकारों को बताना चाहिए। अंग्रेजी के चिट्ठालेखक लाखों नहीं तो हजारों रुपए अपने चिट्ठों के विज्ञापनों से कमाते हैं। इनमें से कइयों के लिए तो आमदनी का मुख्य स्रोत ही एडसेन्स से प्राप्त रकम है। आज नहीं तो कल, एडसेन्स हिंदी में भी उपलब्ध होगी ही।

यदि एडसेन्स जैसी अन्य विज्ञापन सेवाएं हों, (जैसे याहू के) तो उनके बारे में भी नए चिट्ठाकारों को जानकारी देनी चाहिए।

एडसेन्स के अलावा किस तरह चिट्ठों के लिए विज्ञापन बटोरे जा सकते हैं, इसके बारे में भी अनुभवी चिट्ठाकारों को नए चिट्ठाकारों को मार्गदर्शन देना चाहिए।

2. चिट्ठा विधा की खास लक्षणों की जानकारी दी जानी चाहिए। चिट्ठा विधा अखबारी लेख लिखने या रिपोर्ट लिखने, या साधारण कागजी चिट्ठी लिखने, या डायरी लिखने से पर्याप्त भिन्न है। उसकी कुछ मूलभूत विशेषताएं हैं - जैसे संक्षिप्त होना, हाइपर टेक्स्ट के रूप में लिखना, खोज इंजनों के अनुकूल भाषा लिखना (जैसे लोकप्रिय कुंजी शब्दों का उपयोग करते हुए लिखना ताकि खोज इंजन आपके चिट्ठे के पन्नों को आसानी से ढूंढ़ सकें), इत्यादि।

3. चिट्ठा आपने बना लिया, यह तो आसान है, पांच दस मिनट में बन जाता है। पर अब क्या करें? उसे प्रचारित कैसे करें? इस बारे में भी नए चिट्ठाकारों को बताना चाहिए, जैसे अपने चिट्ठे को गूगल, याहू आदी में सबमिट करना, एक-दूसरे के चिट्ठे में लिंक्स देना, ईमेल सिग्नेचर में चिट्ठे के जाल पते को शामिल करना, इत्यादि।

4. अंतरजाल में हजारों चिट्ठे हैं, और रोज नए चिट्ठे बनते जा रहे हैं। इस भीड़-भाड़ में आपका चिट्ठा तभी टिका रह सकेगा, जब उसमें कोई विशिष्टता हो, जो अन्य चिट्ठों में नहीं है, तभी लोग उसकी ओर बार बार खिंचे चले आएंगे। यह विशिष्टता कैसे लाई जाए, इसकी भी जानकारी नए चिट्ठाकारों को दी जानी चाहिए।

मेरा एक अन्य विचार भी है जो नौसिखिए चिट्टाकारों के लिए ही नहीं, सभी हिंदी चिट्टाकारों के लिए प्रासंगिक है। यह है जल्द से जल्द एडसेन्स को हिंदी के लिए उपलब्ध कराना। जिन चिट्टाकारों की पहुंच गूगल के डेवलपरों तक है, उन्हें उनसे बात करके एडसेन्स द्वारा समर्थित भाषाओं में हिंदी को शामिल कराना चाहिए। जब यह हो जाएगा, तो हिंदी चिट्ठा जगत में एटमी विस्फोट हो जाएगा, क्योंकि लोग इससे आमदनी भी कमा सकेंगे।